राजधानी रायपुर में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई: करोड़ों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जीवित पैंगोलिन बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार

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स्वराज जयसवाल की विशेष रिपोर्ट 

 

राजधानी रायपुर 

 

रायपुर में वन विभाग की सतर्कता ने एक बड़े वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई सटीक कार्रवाई में करीब 20 किलो वजनी दुर्लभ पैंगोलिन को सुरक्षित बरामद किया गया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। इस मामले में बालाघाट और भानुप्रतापपुर क्षेत्र के दो आरोपियों—प्यारे लाल गोपेचा और गोविंद हलदार—को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। वन विभाग अब पूरे तस्करी गिरोह की गहन जांच में जुट गया है।

 

 

राजधानी रायपुर से वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। वन विभाग की सतर्कता और लगातार निगरानी के चलते दुर्लभ वन्यजीवों की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। विभाग की टीम ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए एक जीवित पैंगोलिन को सुरक्षित बरामद किया है, जो विश्व के सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले जीवों में शामिल है।

सूत्रों के अनुसार, वन विभाग की टीम पिछले एक सप्ताह से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी। गुप्त सूचना मिलने के बाद अधिकारियों ने रणनीति तैयार कर दबिश दी और आरोपियों को मौके पर ही पकड़ लिया। इस सफल ऑपरेशन में वन अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिन-रात मेहनत कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्यारे लाल गोपेचा (निवासी बालाघाट) और गोविंद हलदार (निवासी भानुप्रतापपुर, कांकेर) के रूप में की गई है। प्रारंभिक पूछताछ में इनके एक बड़े तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पैंगोलिन की खाल और अंगों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है, जिसके चलते इसका अवैध शिकार और तस्करी तेजी से बढ़ रही है। यह जीव अत्यंत दुर्लभ और संरक्षित श्रेणी में आता है।

बरामद पैंगोलिन को फिलहाल वन्यजीव संरक्षण केंद्र में सुरक्षित रखा गया है, जहां उसकी देखभाल की जा रही है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच की जाएगी और इसमें शामिल अन्य आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।

अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की वन्यजीव तस्करी या शिकार से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत प्रशासन को दें, ताकि समय रहते सख्त कार्रवाई की जा सके।

 

यह कार्रवाई वन विभाग की बड़ी सफलता मानी जा रही है, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक मजबूत और निर्णायक कदम है।

 

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