▪ बांकीमोंगरा थाना क्षेत्र के जवाली गांव में दबंगों ने घर में घुसकर युवक पर किया जानलेवा हमला
▪ नगदी 43 हजार की लूट के बावजूद पुलिस ने नहीं लिखी शिकायत, एसपी के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुआ केस
कोरबा। जिले में अपराध पर नियंत्रण के लिए पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने सभी थाना प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। बावजूद इसके, बांकीमोंगरा थाना की लापरवाही तब उजागर हुई जब एक युवक से मारपीट और लूट की घटना के बाद भी पुलिस ने उसकी शिकायत दर्ज नहीं की। आखिरकार, एसपी के सख्त हस्तक्षेप और फटकार के बाद मामला दर्ज किया गया।
होली के दिन घर में घुसकर हमला, धारदार हथियार से पीटा
घटना 14 मार्च की दोपहर की है। जवाली निवासी सूरज कुमार कुर्रे अपने घर में आराम कर रहा था, तभी चाकाबुड़ा के राहुल कश्यप, सूरज पटेल, अक्षय और उनके अन्य साथियों ने उसके मकान की बाउंड्री वॉल तोड़कर जबरन घर में घुसकर हमला कर दिया। आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए धारदार हथियार, लोहे की रॉड और पाइप से सूरज पर जानलेवा हमला किया, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया।
लूटपाट के बाद हुई तोड़फोड़, पुलिस ने नहीं लिखी रिपोर्ट
हमलावरों ने घर के सामानों को भी तहस-नहस कर दिया और आलमारी में रखे 43 हजार रुपये लूटकर फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल सूरज को प्राथमिक उपचार के लिए कटघोरा सीएचसी में भर्ती कराया, जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया।
जब सूरज कुर्रे स्वस्थ हुआ, तो 18 मार्च को वह पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और लिखित शिकायत की पावती लेकर बांकीमोंगरा थाना गया। लेकिन थाना प्रभारी निरीक्षक तेज कुमार यादव ने मामला दर्ज करने में आनाकानी की।
एसपी के आदेश के बावजूद थाना प्रभारी ने टालमटोल किया
19 मार्च को सूरज ने फिर से पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी से मुलाकात कर अपनी पीड़ा सुनाई। एसपी ने तत्काल थाना प्रभारी को केस दर्ज करने का निर्देश दिया, लेकिन थाना प्रभारी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जब सूरज ने दोबारा एसपी से संपर्क किया, तब एसपी ने थाना प्रभारी को कड़ी फटकार लगाई।
इसके बाद ही मारपीट, लूट और बलवा की धाराओं में मामला दर्ज किया गया। पीड़ित सूरज ने एसपी का आभार व्यक्त किया और न्याय की उम्मीद जताई।
पुलिस की लापरवाही पर सवाल
इस घटना ने पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर थाना प्रभारी को केस दर्ज करने के लिए एसपी की फटकार क्यों लगानी पड़ी? यदि पीड़ित सीधे थाने पहुंचा था, तो उसकी शिकायत तुरंत दर्ज क्यों नहीं की गई? यह मामला उन पीड़ितों के लिए एक मिसाल बन सकता है, जो न्याय के लिए भटकते रहते हैं।
निष्कर्ष:
इस घटना से साफ है कि पुलिस की लापरवाही कभी-कभी अपराधियों को खुली छूट दे देती है। लेकिन पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी की सख्ती से यह मामला उजागर हुआ और पीड़ित को न्याय मिल सका। क्या अब पुलिस प्रशासन अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करेगा?








