सारंगढ़। छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता और सांस्कृतिक परंपरा का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला, जब सारंगढ़ में आयोजित प्रदेश स्तरीय पत्रकार कार्यशाला में राज्य के उप मुख्यमंत्री अरुण साव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके सभागार में पहुंचते ही वातावरण तालियों की गूंज और उत्साह से भर गया।

कार्यक्रम स्थल पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव का स्वागत छत्तीसगढ़ी लोक परंपराओं के अनुरूप किया गया। लोक कलाकारों ने “अरपा पैरी के धार” और “छत्तीसगढ़ महतारी” जैसे गीतों की प्रस्तुति देकर न केवल अतिथियों बल्कि उपस्थित पत्रकारों को भी भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।

इस प्रदेश स्तरीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और युवा मीडिया प्रतिनिधि शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने संबोधन में कहा कि मीडिया लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ है और समाज को सही दिशा देने में इसकी भूमिका निर्णायक होती है। उन्होंने कहा कि डिजिटल दौर में खबरों की गति तेज हुई है, लेकिन सत्य, निष्पक्षता और जनहित से समझौता नहीं होना चाहिए।

उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की प्रशंसा करते हुए कहा कि लोक गायन और पारंपरिक कला हमारी पहचान हैं, जिनका संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। साथ ही पत्रकारों से अपील की कि वे शासन की योजनाओं, ग्रामीण अंचलों की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ जनता तक पहुंचाएं।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकारों ने भी अपने अनुभव साझा किए और नई पीढ़ी को नैतिक पत्रकारिता, जिम्मेदार लेखन और खोजी रिपोर्टिंग के महत्व से अवगत कराया। मंच से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और सजग बनाने का दायित्व भी है।
संवाद सत्र, प्रशिक्षण कार्यशालाएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को सार्थक बना दिया। कुल मिलाकर सारंगढ़ में आयोजित यह प्रदेश स्तरीय पत्रकार कार्यशाला पत्रकारिता, लोक संस्कृति और सामाजिक सरोकारों का ऐसा संगम बनी, जो लंबे समय तक याद किया जाएगा।










