छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए वरदान: मुनगा की खेती से होगी लाखों की कमाई

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पत्तियों से लेकर फलों तक में औषधीय गुण, बढ़ती मांग के चलते बढ़ा कारोबार

रायपुर: छत्तीसगढ़ में किसान अब परंपरागत फसलों के साथ-साथ लाभदायक बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसी ही एक फसल है मुनगा (सहजन), जिसे मोरिंगा या ड्रमस्टिक के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खेती से किसानों को बेहतर आय मिल रही है, क्योंकि इसके पत्ते, फल, बीज और तना—सभी बाजार में अच्छी कीमत पर बिकते हैं।

क्यों खास है मुनगा की खेती?

मुनगा को आयुर्वेद में औषधीय पौधा माना गया है, जो शरीर को रोगों से बचाने में मदद करता है। इसके पौधों का उपयोग औषधीय कंपनियों से लेकर कॉस्मेटिक उद्योग तक में किया जाता है। यही वजह है कि हर साल छत्तीसगढ़ से इसका निर्यात भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।

कम निवेश में ज्यादा मुनाफा

विशेषज्ञों के अनुसार, मुनगा के पेड़ पहले 3-4 साल में 20-30 किलोग्राम प्रति पौधा और बाद में 40-50 किलोग्राम तक उपज देते हैं। यदि किसान इसे 3×3 मीटर की दूरी पर लगाते हैं, तो प्रति हेक्टेयर 20-25 टन उपज प्राप्त हो सकती है। इससे किसान 1 लाख से 1.50 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।

कम देखभाल में अधिक लाभ

  • मुनगा की खेती में कम पानी और खाद की जरूरत होती है, जिससे किसानों का खर्च कम होता है।
  • यह फसल कम समय में अच्छी पैदावार देती है और अन्य फसलों के साथ भी आसानी से उगाई जा सकती है।
  • इसकी मांग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार दोनों में तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों को इसका सीधा फायदा मिल रहा है।

किसानों के लिए फायदेमंद विकल्प

विशेषज्ञों का मानना है कि मुनगा की खेती छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प बन सकती है। बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार भी किसानों को प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है। यदि सही तकनीकों का उपयोग किया जाए, तो किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।


👉 यदि आप भी खेती-किसानी में नया विकल्प तलाश रहे हैं, तो मुनगा की खेती से अच्छा अवसर मिल सकता है।

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