कोरबा। शादी-ब्याह और सामाजिक कार्यक्रमों का मौसम शुरू होते ही ट्रैक्टर, मेटाडोर, पिकअप, छोटा हाथी जैसे मालवाहक वाहन, सवारी गाड़ियों में तब्दील हो गए हैं। हादसों के बावजूद लोग और वाहन मालिक कोई सबक नहीं ले रहे। सस्ते भाड़े और कम खर्च के चलते मध्यम और गरीब तबका इन वाहनों का उपयोग कर रहा है। जबकि मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार मालवाहकों में यात्रियों का सफर प्रतिबंधित है।
हादसों से नहीं लिया सबक
हाल ही में उरगा थाना क्षेत्र के मुकुंदपुर और मड़वारानी के बीच एक पिकअप हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई थी। सक्ति जिले के ग्राम रेड़ा से लोग छट्ठी कार्यक्रम में शामिल होने खरहरी जा रहे थे, तभी तेज रफ्तार और चालक की लापरवाही से पिकअप हसदेव नहर में गिर गई। इसके बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोकटोक मालवाहकों में सवारी ढोने का सिलसिला जारी है।
कम खर्च, ज्यादा जोखिम
शादी सीजन में अमूमन बड़े घराने यात्री बसें बुक करते हैं, लेकिन मध्यम व निम्न वर्ग के लोग बारात और अन्य कार्यक्रमों के लिए मालवाहक गाड़ियों का सहारा लेते हैं। क्योंकि इनका भाड़ा बसों की तुलना में कम होता है। लेकिन यह जोखिम भरा है, क्योंकि दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों को मुआवजा नहीं मिल पाता और बीमा कंपनी भी क्लेम देने से इंकार कर देती है।
ड्राइवरों को नहीं नियमों की जानकारी, कई बिना लाइसेंस
ग्रामीण इलाकों में ट्रैक्टर या मालवाहक चलाने वाले ड्राइवरों को यातायात नियमों की जानकारी नहीं होती। अधिकतर के पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं होता। कई मानते हैं कि शहर में लाइसेंस जरूरी होता है, लेकिन गांवों में इसकी जरूरत नहीं। ऐसे में तेज रफ्तार और लापरवाही भरी ड्राइविंग, हादसों को दावत दे रही है।
सख्त कार्रवाई और जागरूकता की ज़रूरत
पुलिस और परिवहन विभाग को चाहिए कि वे एक साथ सघन अभियान चलाएं। सभी थानों-चौकियों में मालवाहकों में सवारी ढोने पर कार्रवाई, जागरूकता कार्यक्रम, सड़क सुरक्षा अभियान और वाहन मालिक-चालक बैठक आयोजित करें। सभी को सख्त निर्देश दिए जाएं कि सवारी बैठी मिलने या हादसे की स्थिति में कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कानून का उल्लंघन और खतरनाक चलन
पुलिस व मोटर व्हीकल एक्ट के मुताबिक, मालवाहकों का सवारी वाहन की तरह इस्तेमाल अवैध और खतरनाक है। जानबूझकर सवारी बैठाकर दुर्घटना करवाने पर चालक और वाहन मालिक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का अपराध दर्ज किया जा सकता है। साथ ही बीमा कंपनियां भी किसी प्रकार का मुआवजा नहीं देंगी।
वाहन के सभी दस्तावेज — आरसी, फिटनेस, लाइसेंस, इंश्योरेंस आदि अपडेट और साथ रखना अनिवार्य है।
समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी
मालवाहकों को सवारी वाहन बनाने की मानसिकता बदलना जरूरी है। प्रशासन को सख्ती करनी चाहिए और लोगों को भी सुरक्षित यात्रा और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।









