सचिन तेंदुलकर का छत्तीसगढ़ से जुड़ा है खास रिश्ता, नवरात्रि में इस मंदिर में जलता है नाम से ज्योति कलश

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बिलासपुर। नवरात्रि का पर्व इन दिनों पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। ऐसा ही नजारा बिलासपुर से महज 8 किलोमीटर दूर स्थित बैमा नागोई गांव के मां महामाया मंदिर में देखने को मिल रहा है। यहां भक्तों की आस्था का सैलाब उमड़ा हुआ है। लेकिन इस मंदिर की खास बात सिर्फ भक्ति तक सीमित नहीं है—इसका गहरा संबंध क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर से भी है।


मां महामाया विराजित हैं लक्ष्मी स्वरूप में

मंदिर के पुजारी शुभम बारगाह बताते हैं कि मां महामाया यहां लक्ष्मी स्वरूप में विराजित हैं। पूरे सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना बना रहता है, लेकिन नवरात्रि में श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच जाती है। मंदिर में हजारों ज्योति कलश की स्थापना होती है—जिनमें से कई NRI श्रद्धालु भी शामिल होते हैं।


मंदिर की अनोखी परंपरा: आरती के समय सामने खड़ा होना वर्जित

यह मंदिर अपनी एक खास परंपरा के लिए भी प्रसिद्ध है। श्रद्धालु साक्षी यादव और धार्मिक यादव ने बताया कि यहां आरती और भोग के समय मां के सामने खड़ा होना वर्जित है। यह नियम मंदिर की परंपरा और अनुशासन को दर्शाता है। हर साल नवरात्रि में इस परंपरा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं।


सचिन तेंदुलकर के नाम पर जलता है ज्योति कलश

इस मंदिर का संबंध पूर्व भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर से कैसे है, यह जानकर आप हैरान रह जाएंगे। दरअसल, मंदिर में वर्षों तक सेवा देने वाले गौरी शंकर गिरनारी बाबा जी सचिन तेंदुलकर के बड़े भक्त थे। जब तक वे जीवित रहे, हर नवरात्रि में सचिन तेंदुलकर के नाम से एक ज्योति कलश की स्थापना करते थे।


मंदिर में हैं ‘सचिन’ और ‘तेंदुलकर’ नामक वटवृक्ष

बाबा जी ने मंदिर परिसर में दो वटवृक्ष भी रोपे थे। एक का नाम रखा ‘सचिन’ और दूसरे का ‘तेंदुलकर’। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि एक दिन ये दोनों वृक्ष आपस में मिल जाएंगे। आज ये पेड़ बड़े हो चुके हैं और धीरे-धीरे एक-दूसरे की ओर झुक रहे हैं—जिसे लोग बाबा जी की भविष्यवाणी का पूरा होना मानते हैं।


बाबा जी की समाधि पर आज भी शीश नवाते हैं श्रद्धालु

गिरनारी बाबा ने इस मंदिर को अपने सेवा काल में विकसित किया। आज भी श्रद्धालु उनके समाधि स्थल पर जाकर आशीर्वाद लेते हैं। मंदिर में मां महामाया के साथ-साथ बाबा जी के प्रति भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है।

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