रायपुर | झारखंड और छत्तीसगढ़ का कुख्यात गैंगस्टर अमन साव पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। अमन साव को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का करीबी माना जाता था और वह खुद को लॉरेंस का खास बताता था। झारखंड पुलिस जब उसे रायपुर से रांची लेकर जा रही थी, तभी रास्ते में उसकी गाड़ी पलट गई। इस दौरान उसने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने एनकाउंटर में उसे ढेर कर दिया।
अमन साव: पहले माओवादी, फिर बना कुख्यात गैंगस्टर
अमन साव झारखंड के मतबे गांव का रहने वाला था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उस पर 100 से ज्यादा मामले दर्ज थे। उसने पहले एक हार्डकोर माओवादी के रूप में काम किया, लेकिन बाद में 2013 में अपनी खुद की गैंग बना ली, जो झारखंड और छत्तीसगढ़ में सक्रिय हो गई।
रायपुर में फायरिंग और बड़े कारोबारियों को धमकी
13 जुलाई 2024 को रायपुर के तेलीबांधा इलाके में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी पर फायरिंग की गई थी, जिसमें गोली एक कार के शीशे में लगी थी। जांच में इस घटना के पीछे अमन साव गैंग का हाथ होने की पुष्टि हुई। रायपुर में कई बड़े कारोबारियों को धमकाने और वसूली करने के मामले में उसका नाम शामिल था।
कोरबा में बरबरीक ग्रुप पर हमला
करीब ढाई साल पहले अमन साव गैंग ने कोरबा के शंकर नगर इलाके में स्थित बरबरीक ग्रुप के पार्टनर के घर के बाहर फायरिंग की थी। इस हमले के बाद रायपुर पुलिस ने अमन साव गैंग के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
लॉरेंस बिश्नोई से कनेक्शन, हाईटेक हथियारों की सप्लाई
अमन साव लॉरेंस बिश्नोई गैंग का करीबी था और उसे अपराधियों को सप्लाई करता था। इसके बदले में वह हाईटेक हथियार प्राप्त करता था। उसे महंगे कपड़ों और सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने का शौक था।
सोशल मीडिया पर विदेशी कनेक्शन
अमन साव का फेसबुक अकाउंट कनाडा से अमन सिंह नाम के व्यक्ति द्वारा और मलेशिया से सुनील राणा नाम के व्यक्ति द्वारा ऑपरेट किया जाता था।
एनकाउंटर से पहले की घटनाएं
झारखंड पुलिस ने अमन साव को रायपुर पुलिस से 13 जुलाई 2024 की फायरिंग और कोरबा हमले के मामलों की जांच के लिए हिरासत में लिया था। उसे 11 मार्च को रांची ले जाया जा रहा था, तभी रास्ते में उसकी गाड़ी पलट गई। उसने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने एनकाउंटर में उसे ढेर कर दिया।










