छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र: विपक्ष का हंगामा, 29 विधायक निलंबित, धान-चावल के उठाव पर गरमाई बहस

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विधानसभा सत्र में हंगामा, 29 विधायक निलंबित
छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र अपने 11वें दिन भी हंगामेदार रहा। विपक्षी विधायकों ने सेंट्रल पूल में धान उपार्जन समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास किया। स्थगन प्रस्ताव को लेकर तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद 29 विधायकों को निलंबित कर दिया गया।

गर्भगृह में प्रवेश करने पर विपक्षी विधायकों पर कार्रवाई
विपक्षी विधायकों ने गर्भगृह में प्रवेश कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान भारी हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। नियमों के उल्लंघन के कारण 29 विधायकों को स्वमेव निलंबित कर दिया गया।

धान उठाव और चावल जमा करने पर सरकार से जवाब तलब
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा में केंद्रीय पूल में धान उठाव को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने पूछा कि “2024-25 में केंद्र सरकार ने कितने टन चावल जमा करने की अनुमति दी है?” इस पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने जवाब दिया कि “69.72 मीट्रिक टन चावल जमा करने का लक्ष्य रखा गया है, शेष धान के संबंध में जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।”

केंद्र सरकार से धान खरीद की मांग
भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार से धान खरीदने का अनुरोध करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि धान नीलामी से राज्य को करीब 8 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान होगा और केंद्र सरकार की उदासीनता से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

दिव्यांगजन योजनाओं पर बहस, सर्वे प्रक्रिया पर उठे सवाल
विधानसभा में दिव्यांगजन योजनाओं की समीक्षा भी हुई। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने सवाल उठाया कि “2011 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ में 6 लाख से अधिक दिव्यांग हैं, लेकिन सिर्फ 37,537 को ही योजनाओं का लाभ मिल रहा है।” इस पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जवाब दिया कि “दिव्यांग सर्वे खुले निविदा प्रक्रिया के तहत किया गया है और इसके आधार पर पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।”

इन मंत्रियों के विभागों पर चर्चा
🔹 लखनलाल देवांगन – उद्योग विभाग
🔹 लक्ष्मी राजवाड़े – महिला एवं बाल विकास विभाग
🔹 टंकराम वर्मा – ग्रामीण विकास विभाग
🔹 श्यामबिहारी जायसवाल – कृषि विभाग

छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र लगातार हंगामे और तीखी बहसों के बीच जारी है। विपक्ष और सरकार के बीच धान नीति, दिव्यांग योजनाओं और अन्य जनहित के मुद्दों पर टकराव देखने को मिल रहा है।

 

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