कोरिया/छत्तीसगढ़। विशेष रिपोर्ट।
“शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित रहो” — अब समाज को केवल वोट बैंक नहीं, सत्ता और निर्णय प्रक्रिया में भी सम्मानजनक भागीदारी चाहिए!
कोरिया/छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ की राजनीति में कुम्हार समाज की भागीदारी को लेकर एक बड़ा सवाल सामने आया है। आखिर कब तक कुम्हार समाज अपनी मेहनत, परंपरा और सामाजिक योगदान के बावजूद राजनीतिक प्रतिनिधित्व की प्रतीक्षा करता रहेगा? आखिर कब राजनीतिक दल इस समाज की आवाज को सत्ता के गलियारों तक पहुंचाने के लिए गंभीर पहल करेंगे?
भाजपा ओबीसी मोर्चा के कोरिया जिला अध्यक्ष कृष्णा प्रजापति ने कुम्हार समाज की राजनीतिक भागीदारी को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए समाज के लोगों से इस विषय पर खुलकर विचार रखने की अपील की है। उनका संदेश केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग नहीं, बल्कि समाज के सम्मान, अधिकार और भविष्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण चर्चा है।
1 नवंबर 2000 को जगी उम्मीद, लेकिन प्रतिनिधित्व का सवाल आज भी कायम!
जब 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया, तब प्रदेश के विभिन्न समाजों की तरह कुम्हार समाज को भी उम्मीद थी कि नई राजनीतिक व्यवस्था में उसकी कला, संस्कृति, मेहनत और सामाजिक योगदान को उचित पहचान मिलेगी।
लेकिन कृष्णा प्रजापति ने सवाल उठाया है कि राज्य गठन से पहले और बाद में भी विधानसभा में कुम्हार समाज का कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं रहा। ऐसे में समाज के राजनीतिक भविष्य और भागीदारी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या कुम्हार समाज की राजनीतिक पहचान केवल चुनाव के समय वोट देने तक सीमित रहनी चाहिए? क्या समाज की मेहनत, संख्या, परंपरा और योगदान को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भी स्थान नहीं मिलना चाहिए?
ये सवाल किसी एक व्यक्ति के नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों की आकांक्षाओं से जुड़े हैं, जो चाहते हैं कि उनके समाज की आवाज भी विधानसभा और नीति-निर्धारण के मंचों तक पहुंचे।
मिट्टी को आकार देने वाला समाज, अपने राजनीतिक भविष्य को कब देगा नया आकार?
कुम्हार समाज सदियों से अपनी पारंपरिक कला, मेहनत और हुनर के माध्यम से भारतीय संस्कृति को समृद्ध करता आया है। मिट्टी को आकार देकर उपयोगी वस्तुएं बनाने वाला यह समाज आज अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर भी एक नई दिशा की अपेक्षा कर रहा है।
समाज की मांग किसी के अधिकार छीनने की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक भागीदारी, उचित प्रतिनिधित्व और अपनी बात रखने के समान अवसर की है।
जब लोकतंत्र में हर वर्ग की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जाता है, तो कुम्हार समाज की राजनीतिक आकांक्षाओं पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए। राजनीतिक दलों को भी आत्ममंथन करना चाहिए कि समाज की प्रतिभाओं और योग्य नेतृत्व को आगे बढ़ाने के लिए क्या ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
अब समाज को जागरूक, एकजुट और संगठित होने की जरूरत
कृष्णा प्रजापति ने समाज के लोगों से इस मुद्दे पर अपने विचार साझा करने की अपील की है। उनका संदेश स्पष्ट है कि शिक्षा, संगठन, जागरूकता और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की क्षमता ही समाज को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
समाज की एकता ही उसकी ताकत है, शिक्षा उसकी पहचान है और जागरूकता उसके भविष्य की नींव है।
आज आवश्यकता है कि कुम्हार समाज के युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और जागरूक नागरिक एक मंच पर आकर राजनीतिक भागीदारी के सवाल पर गंभीर चर्चा करें। समाज में नेतृत्व की क्षमता रखने वाले लोगों को आगे बढ़ाने, राजनीतिक दलों के सामने अपनी अपेक्षाएं रखने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने की दिशा में सामूहिक प्रयास किए जाएं।
राजनीतिक दलों से सीधा सवाल—कुम्हार समाज को उचित प्रतिनिधित्व कब?
छत्तीसगढ़ में कुम्हार समाज की राजनीतिक भागीदारी का सवाल अब चर्चा और चिंतन की मांग करता है। समाज की अपेक्षा है कि राजनीतिक दल केवल चुनावी समर्थन तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के योग्य और कर्मठ लोगों को भी उचित अवसर देने पर विचार करें।
आखिर कब कुम्हार समाज की आवाज विधानसभा में गूंजेगी? कब समाज की समस्याओं और अपेक्षाओं को नीति-निर्धारण में उचित स्थान मिलेगा? और कब राजनीतिक प्रतिनिधित्व के सवाल पर ठोस पहल दिखाई देगी?
इन सवालों का जवाब समाज और राजनीतिक नेतृत्व—दोनों को मिलकर तलाशना होगा।

कृष्णा प्रजापति की समाज से अपील
कृष्णा प्रजापति ने समस्त कुम्हार समाज के भाइयों से आग्रह किया है कि वे इस महत्वपूर्ण विषय पर अपनी राय अवश्य रखें। समाज के भविष्य, राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर सकारात्मक, संगठित और लोकतांत्रिक संवाद को आगे बढ़ाएं।
“शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित रहो” — यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और सशक्त बनाने का संकल्प है।
अब समय है कि समाज अपनी आवाज को एकजुट होकर बुलंद करे और राजनीतिक भागीदारी के सवाल को मजबूती से सामने रखे।
अब आपकी बारी!
आपकी क्या राय है?
क्या छत्तीसगढ़ में कुम्हार समाज को विधानसभा और अन्य राजनीतिक मंचों पर उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए? समाज की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
जागरूकता बढ़ाने के लिए समाचार को समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।
समाज जागेगा, समाज जुड़ेगा, तभी समाज की आवाज और मजबूत होगी!








