रायगढ़। विशेष रिपोर्ट।
गोदाम प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप, इलाज का आश्वासन देकर मुकरने की बात; पीड़ित ने कलेक्टर और श्रम विभाग से लगाई न्याय की गुहार
रायगढ़। रोजी-रोटी की तलाश में मेहनत करने वाला एक हमाल आज खुद इलाज और आर्थिक मदद के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। उड़ीसा रोड स्थित शकुंतला गोदाम में खरी लोडिंग के दौरान हुए हादसे में 32 वर्षीय हमाल राकेश कुमार कुर्रे के दोनों पैर टूट गए। हादसे को 17 दिन बीत जाने के बावजूद पीड़ित को कथित तौर पर मुआवजा और आर्थिक सहायता नहीं मिली है। अब पीड़ित ने गोदाम प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाने की तैयारी की है।
लोडिंग के दौरान हुआ हादसा, जमीन पर गिरा हमाल
पीड़ित राकेश कुमार कुर्रे के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को लाल टंकी निवासी अनिल केडिया की ओर से छह हमालों को खरी लोडिंग के लिए बुलाया गया था। करीब 600 बोरी लोड होने के बाद ट्रक में आखिरी छल्ली लगाने के दौरान ट्रक का डाला दबाव के चलते बाहर निकल गया।
आरोप है कि मौके पर मौजूद मुंशी ने राकेश को ऊपर चढ़कर बत्ता लगाने के लिए कहा। इसी दौरान नीचे से रस्सी खींचे जाने पर उसका संतुलन बिगड़ गया और वह जमीन पर गिर पड़ा। पीड़ित का आरोप है कि काम के दौरान उसे आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे।

इलाज का आश्वासन, लेकिन मदद का इंतजार
हादसे के बाद घायल हमाल को फटहामुड़ा स्थित एक क्लिनिक ले जाया गया। पीड़ित का आरोप है कि वहां मुंशी ने गोदाम मालिक की ओर से इलाज का पूरा खर्च उठाने का आश्वासन दिया और घटना के बारे में किसी को न बताने की बात कही। लेकिन बाद में कथित तौर पर कोई सहायता नहीं मिली।
अगले दिन जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान दोनों पैरों में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई और प्लास्टर किया गया। चिकित्सकों ने राकेश को तीन महीने तक पूर्ण आराम की सलाह दी है। मेडिकल दस्तावेज और एक्स-रे रिपोर्ट भी चोटों की गंभीरता की पुष्टि करते हैं।

परिवार का इकलौता कमाने वाला, अब रोजी-रोटी पर संकट
राकेश अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य बताया जा रहा है। परिवार में पत्नी, मां, भतीजे और छोटे बच्चों सहित कुल सात सदस्य हैं। बड़े भाई के निधन के बाद उनके बच्चों की जिम्मेदारी भी राकेश के कंधों पर है।
हादसे के बाद काम बंद होने और आर्थिक सहायता नहीं मिलने से परिवार के सामने भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मजबूरी में उधारी लेकर इलाज कराया जा रहा है। एक ओर गंभीर चोटों का दर्द, दूसरी ओर परिवार की चिंता—पीड़ित की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
कलेक्टर, एसपी और श्रम विभाग से न्याय की मांग
पीड़ित अब जूटमिल थाना, पुलिस अधीक्षक, श्रम विभाग और कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपने की तैयारी में है। उसकी प्रमुख मांगों में हादसे की निष्पक्ष जांच, घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराना, जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करना और नियमानुसार क्षतिपूर्ति दिलाना शामिल है।
अब बड़ा सवाल यह है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी और हादसे के बाद पीड़ित को सहायता देने के आश्वासन का क्या हुआ? प्रशासन की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।







