सरगुजा/अम्बिकापुर। विशेष रिपोर्ट।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में खेती-किसानी को नई दिशा देने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से अंबिकापुर ग्राम पंचायत सखौली में एक महत्वाकांक्षी कृषि परियोजना की शुरुआत की तैयारी की जा रही है। 29 अक्टूबर 2026 को ग्राम सखौली में अगरवुड एवं उन्नत कृषि परियोजना को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस परियोजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत किस्म के पौधों और कम जमीन में अधिक उत्पादन की संभावनाओं से जोड़ने की पहल की जा रही है।

बैठक में अगरवुड गुड न्यूट्रिटेक एग्रोवेट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के संचालक संजय कमरो एवं कंपनी के डायरेक्टर दिलीप रावलो जी ने उपस्थित ग्रामीणों और परियोजना से जुड़े सदस्यों को परियोजना की विस्तृत जानकारी दी।
13 एकड़ जमीन पर विकसित होगा आधुनिक कृषि मॉडल
कंपनी के अनुसार, प्रस्तावित परियोजना लगभग 13 एकड़ भूमि में विकसित की जाएगी। इसमें अगरवुड के साथ-साथ काली मिर्च, टमाटर के पेड़ और अन्य उन्नत किस्म के पौधों को शामिल किया जाएगा। परियोजना को इजरायल टेक्नोलॉजी आधारित आधुनिक कृषि पद्धति के अनुसार विकसित करने की योजना है।
इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक और विविधतापूर्ण कृषि के विकल्प उपलब्ध कराना है, ताकि कम जमीन में वैज्ञानिक तरीके से खेती करके बेहतर उत्पादन और अच्छी आमदनी की संभावनाएं विकसित की जा सकें।
काली मिर्च से लेकर टमाटर के पेड़ तक, एक ही परियोजना में कई फसलों का संगम
इस परियोजना की खास बात यह है कि इसमें अलग-अलग उपयोग और उत्पादन क्षमता वाली फसलों को शामिल करने की योजना है।
काली मिर्च की खेती: किसानों को मसाला फसल के रूप में काली मिर्च की उन्नत खेती से जोड़ने और अतिरिक्त आमदनी का अवसर विकसित करने का प्रयास होगा।
टमाटर का पेड़: कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, टमाटर की ऐसी किस्म को शामिल किया जाएगा, जिससे लगभग 12 वर्षों तक लगातार फल उत्पादन की संभावना बताई गई है।
भाटा(बैंगन)का पेड़: परियोजना में भाटा की ऐसी किस्म को भी शामिल करने की जानकारी दी गई, जिससे लगभग 5 वर्षों तक फसल प्राप्त होने की बात बताई गई है।
अन्य उन्नत किस्में: क्षेत्र की जलवायु और भूमि के अनुकूल अन्य पौधों एवं फसलों को भी परियोजना में शामिल करने की योजना है।
इन फसलों का उद्देश्य किसानों को एक ही प्रकार की खेती पर निर्भर रहने के बजाय बहुविकल्पीय कृषि मॉडल से जोड़ना है, जिससे अलग-अलग समय पर उत्पादन और आमदनी के अवसर बन सकें।
अगरवुड यानी ‘लिक्विड गोल्ड’, अंतरराष्ट्रीय बाजार में खास पहचान
इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण अगरवुड का पौधा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय सुगंध उद्योग में बेहद मूल्यवान माना जाता है। अगरवुड को इसकी विशेष सुगंध और इससे प्राप्त होने वाले रेजिन के कारण ‘लिक्विड गोल्ड’ यानी ‘तरल सोना’ के नाम से भी जाना जाता है।
अगरवुड का उपयोग महंगे इत्र, परफ्यूम, सुगंधित तेल, अगरबत्ती और अन्य सुगंधित उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। विशेष परिस्थितियों में इसके तने के अंदर विकसित होने वाला सुगंधित रेजिन इसकी सबसे मूल्यवान विशेषता है।
इसकी एक और खास बात यह है कि अगरवुड की पत्तियों का उपयोग हर्बल चाय और ग्रीन टी जैसे पेय पदार्थों के रूप में भी किया जाता है। इसके हरे हिस्सों का भी विभिन्न उपयोगों में महत्व बताया जाता है।
इस प्रकार अगरवुड का वृक्ष केवल लकड़ी के लिए ही नहीं, बल्कि पत्तियों और सुगंधित रेजिन के कारण भी व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
इजरायल टेक्नोलॉजी से बदलेगी खेती की तस्वीर!
कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया कि परियोजना में इजरायल टेक्नोलॉजी आधारित आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की योजना है। इसके माध्यम से कम भूमि में बेहतर उत्पादन, वैज्ञानिक तरीके से पौधों की देखरेख, पानी का बेहतर प्रबंधन और आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
इस मॉडल का उद्देश्य क्षेत्रीय किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ना और उन्हें ऐसी फसलों के विकल्प उपलब्ध कराना है, जिनसे दीर्घकालीन आर्थिक लाभ की संभावनाएं विकसित हो सकें।
यदि यह परियोजना योजनानुसार धरातल पर सफल होती है, तो आसपास के किसानों के लिए भी यह एक प्रेरणादायक कृषि मॉडल बन सकती है।
ग्रामीणों के सवालों और सुझावों पर हुई चर्चा
बैठक के दौरान उपस्थित लोगों ने परियोजना से जुड़ी जानकारी ध्यानपूर्वक सुनी और अपने सवाल एवं सुझाव रखे। कंपनी संचालक संजय कमरो एवं डायरेक्टर दिलीप रावलो जी ने परियोजना के उद्देश्य, पौधरोपण, देखरेख, संभावित उत्पादन और आगामी कार्ययोजना के संबंध में विस्तार से जानकारी साझा की।
आयोजकों ने बताया कि गांव में परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय सहभागिता, आवश्यक तैयारियों और निर्धारित नियमों के अनुसार आगामी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
कार्यक्रम में ग्रामीणों एवं परियोजना से जुड़े सदस्यों की सहभागिता रही। कंपनी परिवार की ओर से उपस्थित सभी लोगों और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
किसानों के लिए नई उम्मीद, गांव की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई दिशा
ग्राम सखौली में प्रस्तावित 13 एकड़ की यह कृषि परियोजना केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य आधुनिक तकनीक, उन्नत फसलों और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ना है।
अगरवुड, काली मिर्च, टमाटर के पेड़ और अन्य उन्नत किस्मों के माध्यम से किसानों को कम भूमि में विविध प्रकार की खेती के विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
कंपनी का लक्ष्य है कि आधुनिक कृषि तकनीक के माध्यम से क्षेत्रीय किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाए और गांवों में रोजगार, हरियाली तथा आत्मनिर्भरता के नए अवसर विकसित किए जाएं।








