ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का कूटनीतिक प्रहार: 8 देशों में भेजेगा विशेष प्रतिनिधिमंडल

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नई दिल्ली : पाहलगाम आतंकी हमले और उसके जवाब में भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद अब केंद्र सरकार ने एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। भारत 21 और 22 मई को आठ प्रमुख देशों में सांसदों, वरिष्ठ अधिकारियों और रणनीतिक विशेषज्ञों के प्रतिनिधिमंडल भेजेगा, जो वहां की सरकारों को आतंकी हमले की सच्चाई और भारत की सैन्य प्रतिक्रिया से अवगत कराएंगे।

क्या हुआ था पाहलगाम में?

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पाहलगाम में हुए क्रूर आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। इसका सीधा संबंध पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठनों से जोड़ा गया। इसके जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस समेत कई आतंकी ठिकानों को सटीक मिसाइल हमलों से निशाना बनाया।

अब डिप्लोमैसी से होगा जवाब

सैन्य कार्रवाई के बाद अब भारत ने कूटनीतिक मोर्चे पर कदम बढ़ाया है। यह मिशन भारत की अब तक की सबसे बड़ी एंटी-टेरर डिप्लोमैटिक ड्राइव मानी जा रही है।

किन देशों में जाएगा प्रतिनिधिमंडल?

अमेरिका

ब्रिटेन

रूस

जापान

दक्षिण अफ्रीका

यूरोपीय यूनियन

खाड़ी देश (Gulf Nations)

दक्षिण-पूर्व एशियाई देश

प्रत्येक प्रतिनिधिमंडल में होंगे:

कम से कम 5 सांसद

एक वरिष्ठ राजनयिक

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ

इस कूटनीतिक अभियान के तीन मुख्य उद्देश्य:

1. पाकिस्तान की भूमिका को उजागर करना:
विश्व समुदाय को बताया जाएगा कि पाकिस्तान की जमीन से संचालित आतंकी संगठन भारत में निर्दोष लोगों की जान ले रहे हैं।

2. ऑपरेशन सिंदूर को वैध ठहराना:
यह दर्शाना कि भारत की सैन्य कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ है, न कि किसी देश की संप्रभुता के खिलाफ।

3. अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना:
भारत चाहता है कि वैश्विक समुदाय इस मुद्दे पर एकजुट हो और पाकिस्तान पर राजनीतिक व कूटनीतिक दबाव डाले।

क्यों जरूरी है यह रणनीति?

भारत ने सैन्य स्तर पर अपना संदेश स्पष्ट कर दिया है। अब वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने पक्ष को मजबूती से रखने की तैयारी में है। यह मिशन भारत की वैश्विक छवि को और अधिक सुदृढ़ करेगा और पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर जवाब देने के लिए बाध्य करेगा।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने साफ कर दिया है कि अब वह न केवल आतंक का मुकाबला सीमाओं पर करेगा, बल्कि दुनिया के हर मंच पर भी आवाज बुलंद करेगा। आने वाले दिनों में यह कूटनीतिक मिशन भारत के लिए वैश्विक समर्थन की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।

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