क्रमोन्नति वेतनमान, पेंशन, युक्तियुक्तकरण रद्द और बीएड की अनिवार्यता खत्म करने सहित चार अहम मांगों को लेकर आंदोलन
पहली बार एक मंच पर आए राज्य के 21 शिक्षक संगठन
छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य के 21 प्रमुख शिक्षक संगठनों ने पहली बार साझा मंच बनाकर राज्य सरकार से लंबित मांगों के समाधान के लिए सामूहिक रणनीति तैयार की है। शिक्षक संगठनों ने ऐलान किया है कि वे 20 मई, मंगलवार को मंत्रालय (महानदी भवन) का घेराव कर ज्ञापन सौंपेंगे।
प्रमुख मांगें: वेतनमान, पेंशन, युक्तियुक्तकरण और पदोन्नति
संगठनों की मुख्य मांगों में शामिल हैं:
- युक्तियुक्तकरण (Rationalization) प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
- ‘सोना साहू’ की तर्ज पर सभी पात्र शिक्षकों को एरियर्स सहित क्रमोन्नति वेतनमान (Promotion Pay Scale) प्रदान किया जाए।
- प्रथम नियुक्ति दिनांक के आधार पर पेंशन (Pension Benefits) और अन्य लाभ लागू किए जाएं।
- प्राचार्य पदोन्नति (Principal Promotion) में B.Ed की अनिवार्यता समाप्त कर D.Ed/B.Ed दोनों को मान्यता दी जाए।
दो महत्वपूर्ण बैठकें बनी आंदोलन की नींव
शिक्षकों की संयुक्त रणनीति 14 मई को रायपुर के शंकर नगर स्थित राजपत्रित अधिकारी कर्मचारी संगठन कार्यालय में आयोजित बैठक से शुरू हुई। इसके बाद 16 मई को ऑनलाइन बैठक हुई, जिसमें सभी 21 संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और आंदोलन की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया।
पहले 19 मई तय था कार्यक्रम, अब 20 मई को होगा प्रदर्शन
पहले तय कार्यक्रम के अनुसार शिक्षक संगठन 19 मई को मंत्रालय में ज्ञापन सौंपने वाले थे, लेकिन कुछ अपरिहार्य कारणों से यह कार्यक्रम एक दिन आगे बढ़ाकर अब 20 मई, मंगलवार सुबह 11 बजे निर्धारित किया गया है। सभी शिक्षक मंत्रालय के महानदी भवन परिसर में एकत्र होंगे।
आंदोलन की रणनीति: सरकार को दिखाना होगा एकजुटता का असर
शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे अब लंबित मांगों पर केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्यवाही चाहते हैं। यदि मांगों की अनदेखी हुई, तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।










