कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल अंतर्गत चैतुरगढ़ की पहाड़ियों और आसपास के गांवों लाफा व जेमरा में बाघ की मौजूदगी की आशंका जताई जा रही है। वन विभाग ने इन इलाकों में बाघ के पंजों के निशान मिलने की पुष्टि की है। साथ ही दो दिन पूर्व एक मवेशी के शिकार की घटना भी सामने आई है, जिससे बाघ की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में डर का माहौल है।
बाघ के पदचिन्ह और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी
वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और बाघ की गतिविधियों का पता लगाने के लिए दर्जनभर ट्रैप कैमरे इलाके में लगाए हैं। हालांकि अभी तक किसी कैमरे में बाघ की सीधी तस्वीर सामने नहीं आई है। विभाग का कहना है कि वर्तमान में बाघ इलाके में नहीं है, लेकिन उसकी आवाजाही की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
तेंदूपत्ता संग्रहण पर रोक
ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लाफा और जेमरा क्षेत्र में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। विभाग का कहना है कि स्थिति सामान्य होते ही कार्य फिर से शुरू किया जाएगा। कुछ ग्रामीणों ने बाघ को देखे जाने की बात कही है, जिससे इलाके में दहशत और बढ़ गई है।
अचानकमार टाइगर रिजर्व से जुड़ाव
कटघोरा वनमंडल के रेंजर संजय लकड़ा ने जानकारी दी कि यह क्षेत्र अचानकमार टाइगर रिजर्व से सटा हुआ है, जिसके कारण बाघों का आना-जाना इस इलाके में सामान्य है। उन्होंने यह भी बताया कि बाघ की स्थायी उपस्थिति यहां नहीं है, लेकिन एहतियात बरतना आवश्यक है।
सुशासन तिहार से अपील
लाफा में आयोजित सुशासन तिहार के कार्यक्रम में पहुंचे जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह परस्ते ने मंच से ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा, “जानवर से अधिक जरूरी है आपकी सुरक्षा, इसलिए सुबह के समय जंगल न जाएं। जान है तो जहान है।”
वन विभाग की अपील
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल में अकेले न जाएं, बच्चों को बाहर भेजने से परहेज करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को दें। बाघ की उपस्थिति को लेकर जांच और निगरानी का काम लगातार जारी है।







