बिलासपुर। शहर में छोटे व्यापारियों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रशासन द्वारा जारी नए आदेश के तहत अब सार्वजनिक स्थलों पर ठेले और खोमचे लगाने पर रोक लगा दी गई है। इस फैसले का सीधा असर शहर के करीब 1000 से 2000 छोटे व्यापारियों पर पड़ा है, जो ठेले पर चाय-नाश्ता, भजिया और अन्य खाद्य सामग्री बेचकर अपना घर चलाते हैं।
प्रशासन का कहना है कि उन्हें अब स्थायी दुकान लेकर व्यापार करना होगा। लेकिन अधिकांश ठेले व्यापारी इसे अपने लिए असंभव बता रहे हैं, क्योंकि दुकानों का मासिक किराया 20,000 से 25,000 रुपये तक बताया जा रहा है, जबकि इन व्यापारियों की औसत आय 10,000 से 15,000 रुपये प्रतिमाह है।
व्यापारियों का कहना है कि सरकार एक ओर जहां स्वरोजगार को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे फैसले उन मेहनतकश लोगों के लिए संकट बनकर आ रहे हैं जो ईमानदारी से अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। मौजूदा समय में बेरोजगारी और महंगाई की मार झेल रहे इन लोगों के लिए यह आदेश दोहरी मुसीबत बन गया है।
इस फैसले के विरोध में व्यापारियों ने जिलाधीश को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि जब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती, तब तक उन्हें पहले की तरह व्यवसाय जारी रखने की अनुमति दी जाए। व्यापारियों का कहना है कि शहर में कई ऐसे स्थान हैं, जहाँ बिना अव्यवस्था फैलाए ठेले लगाए जा सकते हैं।
ज्ञापन पर सैकड़ों ठेले व्यवसायियों ने हस्ताक्षर कर प्रशासन से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है, ताकि उनका रोजगार सुरक्षित रह सके और वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।








