बिलासपुर । शासन से मुआवजा पाने के लिए किस हद तक जाया जा सकता है, इसका चौंकाने वाला मामला बिलासपुर जिले के बिल्हा थाना क्षेत्र में सामने आया है। यहां मृतक के परिजनों ने सामान्य बीमारी और संदिग्ध हालात में हुई मौत को सांप काटने से हुई मौत बता दिया, जिससे मुआवजे की राशि हासिल की जा सके।
झूठ का पर्दाफाश, पुलिस ने फिर से शुरू की जांच
मामला पोड़ी गांव निवासी शिवकुमार घृतलहरे (36) की मौत से जुड़ा है। प्रारंभिक दस्तावेजों और परिजनों के बयानों के आधार पर यह दावा किया गया था कि शिवकुमार की मौत सांप के काटने से हुई है। लेकिन पुलिस को जांच के दौरान संदेह हुआ, जिसके बाद पुन: जांच शुरू की गई।
कब्र से निकाला गया शव, दोबारा कराया गया पोस्टमार्टम
शनिवार को बिल्हा पुलिस ने तहसीलदार की मौजूदगी में शिवकुमार का शव कब्र से निकलवाया और सिम्स अस्पताल में दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया। जांच में खुलासा हुआ कि मृतक के शरीर पर सांप काटने का कोई निशान नहीं था। इसके बजाय मौत का कारण शराब और जहर सेवन पाया गया है।
परिजनों ने कबूला झूठ, दस्तावेजों में की थी हेरफेर
पुलिस की सख्ती और साक्ष्यों के सामने आने के बाद मृतक के परिजनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने दस्तावेजों में हेरफेर की थी और गलत जानकारी देकर मुआवजा प्राप्त किया। अब पुलिस न केवल पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर बल्कि मुआवजा प्रक्रिया से जुड़े अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भी भूमिका की जांच कर रही है।
सरकारी तंत्र को गुमराह करने की साजिश
इस पूरे मामले ने सरकारी मुआवजा प्रणाली की खामियों को भी उजागर कर दिया है। यदि पुलिस समय रहते मामले को गंभीरता से न लेती, तो यह धोखाधड़ी पकड़ी नहीं जाती। अब प्रशासन इस मामले में कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है।







