पाली जनपद सीईओ पर गंभीर आरोप: पंचायतों से चुनावी खर्च के नाम पर 15-20 हजार की कथित वसूली, सरपंचों-सचिवों में आक्रोश

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कोरबा पाली 17 जून । पाली जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) भूपेंद्र सोनवानी एक बार फिर से विवादों के घेरे में हैं। पंचायतों से कथित रूप से चुनावी व्यय के नाम पर अवैध रूप से 15 से 20 हजार रुपये की वसूली किए जाने का आरोप सामने आया है। जनपद के सरपंचों और सचिवों ने इस वसूली को अनुचित और दबावपूर्वक बताया है, जिसे लेकर पंचायत प्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है।

सूत्रों के अनुसार, जनपद की 93 ग्राम पंचायतों में से लगभग 70 प्रतिशत पंचायत सचिवों से यह राशि पहले ही वसूल ली गई है। यदि औसतन 15 से 20 हजार रुपये प्रति पंचायत वसूले गए हैं, तो यह आंकड़ा करीब 14 से 18 लाख रुपये तक पहुंचता है। सचिवों का कहना है कि यह राशि जिला प्रशासन को निर्वाचन व्यय के भुगतान के नाम पर मांगी जा रही है, लेकिन ऐसी किसी भी अधिकृत मांग या आदेश की पुष्टि अन्य जनपद अधिकारियों ने नहीं की है।

पूर्ववर्ती कार्यकाल में भी लगे थे भ्रष्टाचार के आरोप

यह पहला मामला नहीं है जब सीईओ सोनवानी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हों। उनके पहले कार्यकाल के दौरान भी निर्माण कार्यों में भारी कमीशन और पंचायतों से अनावश्यक वसूली को लेकर सरपंच संघ ने जिला प्रशासन से शिकायत की थी। उस समय तत्कालीन कलेक्टर ने उन्हें पाली जनपद से हटाकर अपने अधीन अटैच कर लिया था।

बावजूद इसके, कुछ समय बाद वे पुनः पाली जनपद में पदस्थ हो गए और अब एक बार फिर से उनके कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में लोकसभा चुनाव से पहले भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार उन्हें बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ जनपद पंचायत स्थानांतरित किया गया था, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही वे फिर से पाली लौट आए।

सरपंचों ने बताया “अवैध वसूली”, जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग

ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने इसे पूरी तरह अवैध वसूली बताते हुए जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। कई सचिवों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे इस दबाव में पैसे देने को मजबूर हुए क्योंकि मना करने पर उन्हें परेशान किए जाने की आशंका थी।

इस पूरे मामले ने यह साफ कर दिया है कि अगर समय रहते जिला प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो पंचायत व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और भी गहराता जाएगा। अब देखना यह है कि क्या जिला कलेक्टर इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर जांच के आदेश देते हैं या यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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