कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा। ग्राम पंचायत कोरबी (सी) में पंचायत निधियों के दुरुपयोग और कागजों पर किए गए कार्यों का बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने पूर्व सरपंच पुनिता कंवर और तत्कालीन सचिव मेहरून निशा पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं।
सूत्रों के अनुसार, पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ीकरण के नाम पर पंचायत ने 15वें वित्त आयोग से ₹18.68 लाख खर्च दिखाए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गांव में जल व्यवस्था जस की तस है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी राशि वाकई खर्च होती, तो हर घर तक नल का जल पहुंच चुका होता।
इतना ही नहीं, नाली निर्माण और प्राथमिक शाला के अतिरिक्त कक्ष की मरम्मत के नाम पर ₹3.54 लाख की राशि निकाली गई, जबकि मौके पर न तो नाली दिखाई देती है और न ही कोई नया या मरम्मतशुदा कक्ष।
शासकीय भवनों की रंगाई-पोताई, मरम्मत और मार्ग सुधारीकरण के लिए भी ₹2.38 लाख खर्च दिखाए गए। जांच में सामने आया कि पंचायत भवन, आंगनबाड़ी और प्राथमिक शाला की मरम्मत अथवा रंगाई-पोताई बीते पांच वर्षों में कभी नहीं हुई। ग्रामीणों ने इन कार्यों को ‘कागजी खानापूर्ति’ करार दिया है।
इन खर्चों को सही ठहराने के लिए फर्जी बिल, भाड़ा पर्ची, और मजदूरी भुगतान का सहारा लिया गया। पंचायत रजिस्टरों में दर्ज रिचार्ज बाउचर भी इसकी पुष्टि करते हैं, जिनकी तिथियां 2020 से 2023 तक फैली हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सचिव का कार्यकाल स्थायी होने के कारण वह अधिक प्रभावशाली हो जाते हैं, और यही कारण है कि सरकारी तंत्र और कानून की परवाह किए बिना मनमानी की गई।
ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच एवं दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र जांच नहीं हुई, तो वे जन आंदोलन की राह अपनाने को बाध्य होंगे।







