कोरबा/पाली। पाली जल संसाधन उपसंभाग के अंतर्गत सेन्द्रीपाली बांध से निकली 2400 मीटर लंबी माइनर नाली नहर की सीसी लाइनिंग निर्माण परियोजना पर भ्रष्टाचार और निर्माण में भारी अनियमितता के आरोप लगे हैं। जनपद सदस्य संगीता सूरज कोराम सहित क्षेत्रीय किसानों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लगभग 2.76 करोड़ रुपये की लागत से चल रही इस सिंचाई परियोजना में घटिया सामग्री का उपयोग किए जाने की बात सामने आ रही है, जिससे किसानों में भारी रोष है।
घटिया रेत और निम्न ग्रेड सीमेंट का उपयोग
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में ठेकेदार द्वारा स्थानीय नदी-नालों से निकाली गई बजरी युक्त रेत का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें गाद की मात्रा अधिक होने से निर्माण की टिकाऊपन पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।
वहीं, 53 ग्रेड की जगह 43 ग्रेड सीमेंट के उपयोग का आरोप भी लगाया गया है। जनपद सदस्य श्रीमती कोराम ने कहा कि कम ग्रेड के सीमेंट और घटिया रेत से बना यह निर्माण तेज पानी के बहाव को लंबे समय तक सहन नहीं कर पाएगा, जिससे नहर के टूटने की आशंका बनी हुई है।
निर्माण स्थल से जानकारी बोर्ड नदारद
सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य है, लेकिन सेन्द्रीपाली में निर्माण स्थल पर ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगाया गया है। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने इसे भ्रष्टाचार छिपाने का प्रयास बताया है।
विभागीय लापरवाही पर भी सवाल
इस मामले में विभाग के एसडीओ एस.पी. टुंडे की कार्यशैली भी कटघरे में है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते और अधिकांश समय अपने निवास स्थान पर ही रहते हैं, जिससे किसानों को आवश्यक जानकारी और सहायता समय पर नहीं मिल पाती। कई किसान भूमि अधिग्रहण और मुआवजा संबंधी मामलों को लेकर विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
एसडीओ से संपर्क नहीं हो पाया
मामले पर प्रतिक्रिया जानने एसडीओ एस.पी. टुंडे से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनके कार्यालय में अनुपस्थित रहने के कारण बयान नहीं मिल सका।









