कोरबा में 1.71 लाख का फर्जी मेडिकल रीइंबर्समेंट घोटाला उजागर, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत का आरोप

Spread the love

आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत के बाद जांच से पहले लीपापोती की कोशिशें तेज, सवालों के घेरे में अधिकारी

कोरबा/पाली। जिले में चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोप है कि शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से 1.71 लाख रुपए का फर्जी भुगतान कर दिया गया। यह पूरा मामला पाली विकासखंड के शासकीय हाईस्कूल बकसाही में पदस्थ व्याख्याता सुभाषचंद्र गुप्ता, उनकी पत्नी संतोषनी गुप्ता और पुत्री अनुष्का गुप्ता से जुड़ा है।

मामले का खुलासा तब हुआ जब आरटीआई कार्यकर्ता विजय (बादल) दुबे ने सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज प्राप्त किए। दस्तावेजों में पाया गया कि गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए प्रस्तुत किए गए चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल में ऐसी दवाइयाँ दर्ज थीं, जो चिकित्सा उपचार से असंबंधित हैं। इनमें मैनफोर्स, वियाग्रा, कोलगेट सेंसिटिव टूथपेस्ट, पुदीन हरा, इसबगोल, ईनो, नवरत्न डियो, पॉन्ड्स टैल्क, व्हाइट टोन पाउडर, गुलाबरी गुलाब जल, गुडनाइट रिफिल जैसी दवाइयाँ और सौंदर्य प्रसाधन शामिल हैं।

इतना ही नहीं, बिल में बिलासपुर के अपोलो हॉस्पिटल का नाम अंकित किया गया है, जिसमें उपचारकर्ता चिकित्सक के रूप में डॉ. विजय कुमार श्रीवास का नाम दर्शाया गया है। आरटीआई दस्तावेजों के अनुसार, बिना सत्यापन और जांच के इन बिलों को शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने प्रमाणित कर कोषागार भेजा, जिसके बाद व्याख्याता के खाते में ₹1,71,465 का भुगतान कर दिया गया।

शिकायतकर्ता विजय दुबे ने इस घोटाले की शिकायत 11 अक्टूबर 2025 को कलेक्टर कोरबा सहित मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री, शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री, और संभागायुक्त बिलासपुर को भेजी है। उनका आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मामले की लीपापोती में जुटे हुए हैं।

दुबे ने आरोप लगाया कि इस फर्जीवाड़े में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पाली के प्राचार्य मनोज सराफ, जिला शिक्षाधिकारी तामेश्वर प्रसाद उपाध्याय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सूर्यनारायण केसरी तथा कोषागार अधिकारी की मिलीभगत रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शासन स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्चतम न्यायालय की शरण लेंगे।

उल्लेखनीय है कि इसी तरह का मामला बिलासपुर जिले के बिल्हा ब्लॉक में भी उजागर हुआ था, जहाँ शिक्षक नेता साधेलाल पटेल और उनकी शिक्षिका पत्नी राजकुमारी पटेल ने फर्जी मेडिकल बिल के माध्यम से 7.50 लाख रुपए का गबन किया था। उस प्रकरण में तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों को निलंबित कर एफआईआर दर्ज की गई थी।

कोरबा का यह मामला भी उसी पैटर्न पर आधारित माना जा रहा है, लेकिन अब तक प्रशासनिक कार्रवाई में देरी और जिम्मेदारों को बचाने की कोशिशें सवाल खड़े कर रही हैं। जनता और आरटीआई कार्यकर्ताओं की मांग है कि इस भ्रष्टाचार प्रकरण में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

  • Related Posts

    घरेलू विवाद ने लिया खौफनाक मोड़, आरोपी पति हिरासत में; क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल

    Spread the love

    Spread the love  स्वराज जयसवाल की विशेष की विशेष रिपोर्ट    छत्तीसगढ़/कोरबा   घरेलू विवाद ने लिया हिंसक रूप, पत्नी की हत्या के बाद आरोपी पति हिरासत में; इलाके में…

    जनपद पंचायत पोड़ीउपरोड़ा में विकास कार्यों की सख्त समीक्षा, जिला पंचायत सीईओ दिनेश नाग ने दिए समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश

    Spread the love

    Spread the love    कोरबा/पोड़ीउपरोड़ा विशेष रिपोर्ट     कोरबा/आज दिनांक 18 अप्रैल 2026, दिन शनिवार को जनपद पंचायत पोड़ीउपरोड़ा मुख्यालय में विकास कार्यों की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    error: Content is protected !!