कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा: ग्राम पंचायत कोरबी (सी) में पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर किए गए खर्चों पर सवाल उठने लगे हैं। सरकार जहां ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है, वहीं कोरबी पंचायत में पूर्व सरपंच-सचिव की कथित मिलीभगत से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में रनिंग वाटर सिस्टम के नाम पर लाखों रुपये तो खर्च कर दिए गए, लेकिन धरातल पर नल की एक बूंद भी नहीं टपकी।
रिपोर्ट में सामने आई जमीनी हकीकत
जानकारी के अनुसार, पंचायत की तत्कालीन सरपंच श्रीमती पुनिता कंवर और सचिव मेहरून निशा के कार्यकाल के दौरान 15वें वित्त आयोग से आंगनबाड़ी और स्कूलों में रनिंग वाटर सिस्टम के लिए कुल ₹6,70,237 खर्च दिखाए गए। लेकिन जब वास्तविक स्थिति की जांच की गई, तो आंगनबाड़ी और स्कूलों में कहीं भी रनिंग वाटर की सुविधा नहीं मिली। स्कूलों में अध्ययनरत बच्चे आज भी पुराने हैंडपंप से निकलने वाले फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
बच्चों को शुद्ध पानी नहीं, शिक्षक भी लाचार
स्थानीय स्कूलों के शिक्षकों का कहना है कि बच्चों को पानी पीने के लिए स्कूल परिसर के एकमात्र हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ता है, जो कि शुद्ध नहीं है। कई बच्चे घर से पानी लाकर लाते हैं, वहीं मध्यान्ह भोजन बनाने वाली महिलाएं भी घरों से ही पानी लेकर आती हैं। दोपहर के भोजन के बाद बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है जब वे पानी की तलाश में भटकते हैं।
शौचालय की स्थिति भी दयनीय
रनिंग वाटर की तरह स्कूलों में शौचालय की स्थिति भी जर्जर हो चुकी है। टूटे-फूटे शौचालयों के कारण बच्चों को खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान के बावजूद स्थानीय प्रशासन की अनदेखी से बच्चों और शिक्षकों को मानसिक और शारीरिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
खर्च हुई लाखों की राशि, फिर भी व्यवस्था ढेर
पूर्व सरपंच व सचिव ने केवल रनिंग वाटर ही नहीं, बल्कि पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ करने के नाम पर भी भारी-भरकम राशि निकाली। जिसमें बोर खनन, सबमर्सिबल पंप, पाइपलाइन और सिंटेक्स टंकी की स्थापना जैसे कार्यों का उल्लेख है। मगर, जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश हैंडपंप आज भी हाथ से चलाए जा रहे हैं और सिंटेक्स जैसी व्यवस्था दिखाई नहीं देती।
रिचार्ज बाउचरों से सामने आया खर्च का ब्योरा
- ₹1,06,700 — दिनांक 18/12/2021
- ₹1,98,915 — दिनांक 06/01/2022
- ₹2,00,243 — दिनांक 15/02/2022
- ₹1,64,379 — दिनांक 13/07/2022
इन बाउचरों के जरिए राशि निकाली गई, जबकि जियो-टैगिंग के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि अधिकांश कार्य केवल कागजों में ही हुए।
न वर्तमान सरपंच सक्रिय, न विभागीय निगरानी
वर्तमान सरपंच कीर्ति कुमार उइके और संबंधित पीएचई विभाग ने भी अब तक इस गंभीर समस्या की ओर कोई ठोस ध्यान नहीं दिया है। विभागीय अधिकारी केवल फाइलों में काम निपटा रहे हैं, जबकि गांव के बच्चे आज भी पानी और स्वच्छता के मूलभूत अधिकार से वंचित हैं।









