हितग्राही की जगह परिचित के खाते में दूसरे- तीसरे किश्त की राशि ट्रांसफर कर किया फर्जीवाड़ा, खेत गिरवी रख बनवाया आवास तो एक अन्य की आवास मजदूरी राशि ही डकार गए जिम्मेदार
जांच, करवाई मामले में जिला प्रशासन की खामोशी गंभीर विषय बनकर रह गया.
कोरबा पाली । गरीब व बेघरों के सिर पर अपना छत हो, इसी नेक इरादे और मोदी की गारंटी के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की गई, लेकिन इस योजना के पैसे पर भी घोटालोबाज की गिद्ध दृष्टि बराबर बनी हुई है तथा जरूरतमंदों को पक्के आवास उपलब्ध कराने के लिए लागू इस योजना में घपले घोटाले का दौर जारी है और अधिकारी- कर्मचारी मिलकर योजना पर पलीता लगा रहे है।
पोड़ी उपरोड़ा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत सिंघिया के कर्रा में संबंधितों की मिलीभगत से फर्जी जियो टैग के सहारे बिना आवास निर्माण पूरी राशि भ्रष्ट्राचार की भेंट चढ़ गई तो वहीं पाली जनपद अंतर्गत आवास निर्माण के दूसरे- तीसरे किश्त की राशि हितग्राही के खाते की जगह किसी अन्य के खाते में ट्रांसफर कर फर्जीवाड़ा किया गया। वहीं एक अन्य हितग्राही के आवास निर्माण की अंतिम मजदूरी राशि ही डकार लिया गया।
मामला वर्ष 2023- 24 का है, जहां पाली जनपद के ग्राम पंचायत पोलमी के आश्रित कारीछापर में प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राही रामनारायण पटेल पिता दरसराम के खाते में आवास निर्माण के लिए पहली किश्त की राशि 25 हजार रुपए जनपद से जारी किया गया। हितग्राही ने आवास निर्माण का कार्य प्रारंभ कराया लेकिन उसे दूसरे और तीसरे किश्त जारी नही की गई और लगातार आवास निर्माण का कार्य पूर्ण करने दबाव बनाया गया।
हितग्राही की पत्नी बिरसिया बाई पटेल ने बताई कि ग्राम की रोजगार सहायिका संतोषी यादव एवं जनपद अधिकारियों के दबाव की वजह से उन्होंने अपनी एक खेत 40 हजार में गिरवी रख और जैसे- तैसे आवास का निर्माण कराया पर घोटाला की वजह से प्लास्टर कार्य पूर्ण नही हो पाया है।
हितग्राही ने आगे बताया कि जब वे अप्राप्त दूसरे- तीसरे किश्त की राशि के बारे में जानकारी ली तब पता चला कि जिम्मेदारों की मिलीभगत से उसके खाते की जगह अपने किसी परिचित के खाते में योजना की राशि पहुँचाकर फर्जीवाड़ा को अंजाम दिया गया है। घपलेबाजों ने सरकारी रिकार्ड में हितग्राही के आवास का निर्माण पूर्ण बता दिया है, जबकि हितग्राही का पूरा परिवार निर्माणाधीन आवास में रहने मजबूर है।
ग्रामीण रामनारायण आज भी आवास निर्माण की राशि पाने रोजगार सहायिका से लेकर जनपद अधिकारी का चक्कर लगा रहा है लेकिन उसे राशि नही मिल पाई है और संबंधितों द्वारा गोलमोल जवाब देते आ रहे है। वहीं इसी ग्राम के निवासी एक अन्य ग्रामीण राजेन्द्र मरावी ने बताया कि वर्ष 2016- 17 में उसके नाम पर स्वीकृत पीएम आवास के अंतिम किश्त के रूप में मिलने वाली मजदूरी की राशि 20 हजार रुपये रोजगार सहायिका ने डकार लिया।
जब उसने जनपद कार्यालय से अंतिम किश्त की राशि के बारे जानकारी ली तब ज्ञात हुआ कि राशि तो आहरित हो चुका है। इन ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार सहायिका और पंचायत समन्वयक के सांठगांठ से प्रधानमंत्री आवास निर्माण की राशि मे फर्जीवाड़ा करते हुए वारा- न्यारा किया गया है। इन्होंने आवास निर्माण की शेष राशि दिलाए जाने शासन- प्रशासन से अपेक्षित गुहार लगाई है।
बता दें कि पाली जनपद अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्य मे भारी गड़बड़ी की जा रही है। पीड़ित आवास हितग्राही रामनारायण पटेल और राजेंद्र मरावी जिसकी एक बानगी है। गत वर्षों में स्वीकृत आवास में रोजगार सहायक तो हाल के निर्माण में आवास मित्र द्वारा खेला किया जा रहा है। जिसमे पंचायत ब्लाक समन्वयक की भूमिका अहम है, जो कार्यालय के वातानुकूलीन कक्ष में बैठे- बैठे आवासों का भौतिक सत्यापन कर रहे है और अपने अधीनस्थ कर्मियों को गड़बड़ झाले की खुली छूट दे रखे है।
मिलीभगत से इस घपले घोटाले में किश्त जारी करने के एवज में रिश्वत की मांग, मरे हुए लोगों के नाम पर पीएम आवास की राशि आहरण, पात्र हितग्राही के स्थान पर परिचित के खाते में पैसा ट्रांसफर, फर्जी जियो टैग के सहारे राशि आहरण, अपात्र को पात्र बना पीएम आवास का लाभ, मनरेगा जाबकार्ड का फर्जी उपयोग कर किसी अन्य को योजना का लाभ पहुँचाया जाना जैसे कारनामे शामिल है।
दूसरी ओर इस योजना का लक्ष्य पूरा कराने के फेर में हो रहे भ्रष्ट्राचार पर जिला प्रशासन की खामोशी गंभीर विषय बनकर रह गया है। इससे भ्रष्ट्राचारियों के हौसले को उड़ान मिल गया है और वे इस महत्त्वपूर्ण योजना पर अपनी करतूतों से ग्रहण लगाने में कोई कोर- कसर नही छोड़ रहे है। जिला प्रशासन को इसे गंभीरता से संज्ञान में लेने की जरूरत महसूस की जा रही है।







