कानून की पकड़ और पुलिस की सक्रियता
रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र में एनडीपीएस एक्ट के तहत फरार चल रहे आरोपी की गिरफ्तारी केवल एक पुलिसिया कार्रवाई नहीं, बल्कि यह संकेत है कि कानून की पकड़ चाहे देर से सही, लेकिन ढीली नहीं पड़ती। पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल के निर्देशन में कापू पुलिस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मादक पदार्थों के कारोबार से जुड़े लोग लंबे समय तक बच नहीं सकते।
पुराना मामला, ताजा गिरफ्तारी
15 जुलाई 2025 को ग्राम गोढ़ीखुर्द के पास की गई नाकेबंदी में 984 ग्राम गांजा की बरामदगी ने जिस नेटवर्क की ओर इशारा किया था, उसका एक सिरा तब हाथ से फिसल गया था। मौके से फरार हुआ आरोपी नितेश अग्रवाल उस दिन से कानून की नजरों में था। पांच महीने से अधिक समय तक फरारी के बाद उसकी गिरफ्तारी इस बात का प्रमाण है कि पुलिस ने इस मामले को ठंडे बस्ते में नहीं डाला।
मादक पदार्थों की तस्करी: जड़ें कितनी गहरी
करीब 15 हजार रुपये मूल्य के गांजा और बिना नंबर की मोटरसाइकिल के साथ पकड़ा गया यह मामला सवाल उठाता है कि सीमावर्ती क्षेत्रों से छोटे-छोटे रास्तों के जरिए गांजा तस्करी का यह सिलसिला कितना संगठित है। यह केवल दो व्यक्तियों की गतिविधि नहीं, बल्कि उस चेन का हिस्सा है जो स्थानीय बाजारों तक नशे को पहुंचाने का काम करती है।
गिरफ्तारी का महत्व, लेकिन चुनौती बाकी
30 दिसंबर को ग्राम सलकेता से आरोपी की गिरफ्तारी कापू पुलिस की सतर्कता और सूचना तंत्र की मजबूती को दर्शाती है। हालांकि, यह भी सच है कि एनडीपीएस मामलों में गिरफ्तारी के साथ-साथ नेटवर्क की पूरी परतें खोलना और आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंचना ही असली चुनौती होती है।
स्पष्ट संदेश, सख्त चेतावनी
नितेश अग्रवाल को न्यायिक रिमांड पर भेजे जाने के साथ पुलिस ने यह संदेश दिया है कि मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों के लिए क्षेत्र में कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं है। यह कार्रवाई न केवल अपराधियों के लिए चेतावनी है, बल्कि समाज के लिए भी एक भरोसा कि कानून अपना काम कर रहा है।
कापू पुलिस की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह एक पड़ाव मात्र है, मंज़िल नहीं। आवश्यकता इस बात की है कि ऐसे मामलों में लगातार निगरानी, सख्त अभियोजन और तस्करी के पूरे नेटवर्क पर प्रहार किया जाए, ताकि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर सामाजिक सुरक्षा की मजबूत दीवार बन सके।









