Odisha Gutkha Ban Reality: प्रतिबंध के दावे ज़मीन पर फेल, सुंदरगढ़ के शहरों और गांवों में खुलेआम बिक रहा गुटखा-खैनी, कीमत बढ़ी पर बिक्री जारी

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सरकारी प्रतिबंध के बावजूद बाजार में धड़ल्ले से उपलब्ध तंबाकू उत्पाद

ओडिशा में गुटखा, खैनी, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लागू होने के सरकारी दावों के बावजूद ज़मीनी सच्चाई इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। सुंदरगढ़ जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में वही दुकानें, जहां पहले ये उत्पाद बेचे जाते थे, आज भी इन्हें खुलेआम बेच रही हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि अब इनकी कीमतें डेढ़ से दोगुनी तक बढ़ चुकी हैं।

शहर से गांव तक समान हालात, हर गली-मोहल्ले में उपलब्ध तंबाकू सामग्री

सुंदरगढ़ जिले के शहरांचलों से लेकर ग्रामांचलों तक गुटखा, खैनी और सिगरेट आसानी से उपलब्ध हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिबंध के बाद दुकानों से ये उत्पाद हटने की बजाय और महंगे होकर लौट आए हैं। कई दुकानदार इन्हें काउंटर के नीचे या पर्दे के पीछे रखकर बेच रहे हैं, जिससे कार्रवाई से बचा जा सके।

कीमत बढ़ी, नियंत्रण नहीं — आमजन में सरकार की मंशा पर सवाल

स्थानीय नागरिकों के बीच इस मुद्दे को लेकर नाराजगी साफ देखी जा रही है। लोगों को यह कहते हुए भी सुना गया कि सरकार ने वास्तव में प्रतिबंध लगाने के बजाय केवल दरें बढ़ाने के लिए खोखले बयान दिए हैं। आमजन का मानना है कि यदि प्रतिबंध सख्ती से लागू होता, तो बाजार से ये उत्पाद पूरी तरह गायब होने चाहिए थे।

स्वास्थ्य पर खतरा बरकरार, प्रतिबंध का उद्देश्य होता दिख रहा विफल

गुटखा और खैनी जैसे तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य जनस्वास्थ्य की रक्षा करना था, लेकिन खुलेआम बिक्री जारी रहने से यह उद्देश्य कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। खासकर युवा वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों में इन उत्पादों की आसान उपलब्धता चिंता का विषय बनी हुई है।

प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल, कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित?

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर न तो नियमित जांच दिख रही है और न ही प्रतिबंध तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई। ऐसे में यह प्रतिबंध महज आदेशों तक सीमित होकर रह गया है।

जनता की मांग — बयान नहीं, ज़मीनी कार्रवाई हो

सुंदरगढ़ जिले के लोगों की स्पष्ट मांग है कि यदि सरकार वास्तव में तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध को लेकर गंभीर है, तो उसे सख्त और निरंतर कार्रवाई करनी होगी। केवल आदेश जारी कर देना या कीमतें बढ़ा देना समस्या का समाधान नहीं है।

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