जिले की धान मंडियों में गंभीर हालात
सूरजपुर जिला इन दिनों धान उठाव की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। जिले के अधिकांश धान खरीदी केंद्रों में समय पर उठाव नहीं होने के कारण मंडी परिसर पूरी तरह धान से भर चुके हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि व्यवस्था चरमराने लगी है और इसका सीधा असर किसानों के साथ-साथ मंडी प्रबंधकों पर पड़ रहा है।
किसानों की बढ़ती बेचैनी
धान की खरीदी पूरी होने के बावजूद उठाव नहीं होने से किसानों में भारी असमंजस और चिंता का माहौल है। भुगतान में देरी की आशंका किसानों को परेशान कर रही है, वहीं नए किसानों की उपज रखने के लिए मंडियों में जगह तक उपलब्ध नहीं है। कई किसान रोज मंडी पहुंचकर स्थिति की जानकारी ले रहे हैं, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है।

प्रबंधक दबाव में, जिम्मेदारियां बढ़ीं
मंडी प्रबंधकों की स्थिति भी लगातार बिगड़ती जा रही है। सीमित भंडारण क्षमता, लगातार हो रही खरीदी और उठाव ठप होने से उन पर प्रशासनिक दबाव बढ़ गया है। प्रबंधकों का कहना है कि गोदामों के साथ-साथ खुले प्लेटफॉर्म भी पूरी तरह भर चुके हैं, जिससे प्रबंधन कार्य कठिन होता जा रहा है।

प्रशासन पर उदासीनता के आरोप
किसानों और मंडी प्रबंधकों ने जिला प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि समस्या की जानकारी बार-बार दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस और प्रभावी समाधान सामने नहीं आया है।

तत्काल समाधान की मांग तेज
किसान संगठनों और मंडी प्रबंधकों ने मांग की है कि धान उठाव कार्य में तत्काल तेजी लाई जाए, अतिरिक्त परिवहन संसाधन उपलब्ध कराए जाएं और प्राथमिकता के आधार पर भर चुकी एवं दूरस्थ मंडियों से उठाव शुरू किया जाए।
जमीनी हकीकत
सूरजपुर जिले की मंडियों में धान उठाव की यह समस्या केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की मेहनत, फसल और आजीविका से सीधे जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है। यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।









