रायपुर। छत्तीसगढ़ में हुए बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने रिटायर्ड आईएएस अधिकारी निरंजन दास, होटल कारोबारी नीतेश पुरोहित और उसके बेटे यश पुरोहित को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों लंबे समय से फरार चल रहे थे।
EOW की जांच के अनुसार, रिटायर्ड आईएएस निरंजन दास को इस घोटाले का मुख्य संचालक माना जा रहा है। सिस्टम की नीति-निर्धारण से लेकर पूरे नेटवर्क के संचालन तक की बागडोर उन्हीं के हाथ में थी। आईटीएस अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी के साथ मिलकर उन्होंने करीब तीन वर्षों तक पूरे शराब वितरण तंत्र को नियंत्रित किया।
जांच में यह भी सामने आया है कि राज्य के किस जिले में कौन अधिकारी तैनात होगा, किसकी शराब बिकेगी और किस ब्रांड की सप्लाई होगी—इन सभी फैसलों में निरंजन की सीधी भूमिका थी। EOW ने बताया कि उन्हें 30 करोड़ रुपए से अधिक की कमीशन राशि प्राप्त हुई।
दूसरी तरफ, नीतेश पुरोहित को घोटाले के मुख्य आरोपी कारोबारी अनवर ढेबर का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। बचपन की दोस्ती के कारण नीतेश को नेटवर्क का प्रमुख सदस्य बनाया गया था। उसका बेटा यश पुरोहित भी अनवर के कई प्रोजेक्ट्स में साझेदार है।
जांच में पता चला है कि दोनों ने मिलकर रायपुर में विभिन्न कंपनियों और प्रोजेक्ट्स में लगभग 250 करोड़ रुपए का निवेश किया है। EOW का दावा है कि यश पुरोहित को अनवर के प्रोजेक्ट्स से 50 करोड़ रुपए से अधिक का अवैध लाभ मिला।
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी को इस घोटाले की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। EOW अब इनके हवाले से जुड़े वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और नेटवर्क की गहन पूछताछ कर रही है।








