रायपुर/सुकमा। बहुचर्चित तेंदूपत्ता बोनस घोटाले में निलंबित IFS अधिकारी अशोक पटेल को ACB-EOW की संयुक्त टीम ने बुधवार को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया। कोर्ट ने उन्हें 26 अप्रैल तक की रिमांड पर भेज दिया है। इस दौरान पूछताछ तेज़ कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, 7 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में कई और नाम सामने आ सकते हैं।
2021-22 में हुआ करोड़ों का घोटाला
तेंदूपत्ता बोनस वितरण के नाम पर हुआ यह घोटाला 2021-22 के दौरान सामने आया। आरोप है कि अप्रैल–मई 2022 में वन विभाग द्वारा तेंदूपत्ता संग्राहकों को 7 करोड़ रुपये का बोनस दिया जाना था। राशि बैंक से निकाली जरूर गई, लेकिन आदिवासी संग्राहकों तक नहीं पहुंची। फर्जीवाड़े की भनक लगते ही शासन स्तर पर हलचल मच गई।
मनीष कुंजाम की शिकायत बनी जांच की आधारशिला
जनवरी 2025 में पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने सुकमा कलेक्टर और मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की। इसके बाद प्रशासन और वन विभाग ने अलग-अलग जांच समितियों का गठन किया। प्रारंभिक रिपोर्ट में कई अनियमितताएं उजागर हुईं।
निलंबन और गिरफ्तारी के बाद खुली परतें
जांच के दौरान सुकमा और कोंटा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेंदूपत्ता संग्राहकों के बयान लिए गए। पूछताछ में तत्कालीन डीएफओ अशोक पटेल की संदिग्ध भूमिका सामने आई। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर उन्हें निलंबित कर 17 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया गया।
अब ACB-EOW की सख्त निगरानी
मामला अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के अधीन है। दोनों एजेंसियों की संयुक्त टीम तेंदूपत्ता बोनस घोटाले की परतें खोलने में जुटी है। सुकमा और कोंटा के तेंदूपत्ता प्रबंधकों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान कई और अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता उजागर हो सकती है।









