पाली में पारदर्शी व डिजिटल धान खरीदी से किसानों को बड़ी राहत

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बैंक से सुलभ भुगतान, न पर्ची की परेशानी, न लंबी कतारों का झंझट

कोरबा/पाली। छत्तीसगढ़ सरकार की पारदर्शी और डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था किसानों के लिए राहत और भरोसे का माध्यम बनती जा रही है। घर बैठे ऑनलाइन टोकन सुविधा, उपार्जन केंद्रों में सुव्यवस्थित प्रक्रिया और धान विक्रय के बाद सीधे बैंक खाते में भुगतान—इन सभी व्यवस्थाओं ने किसानों की वर्षों पुरानी समस्याओं को दूर कर दिया है। अब न तो पर्ची के लिए भटकना पड़ता है और न ही बैंक में लंबी कतारों में खड़े होने की चिंता रहती है।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित की पाली शाखा अंतर्गत 5 आदिम जाति सेवा सहकारी समितियां और 10 धान उपार्जन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों से जुड़े लगभग 2800 पंजीकृत किसानों में से अधिकांश ने अपनी धान बिक्री कर नई व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया है। सरकार द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की नीति से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है।

ऑनलाइन टोकन प्रणाली के तहत निर्धारित तिथि पर उपार्जन केंद्र पहुंचने वाले किसानों को डिजिटल तौल कांटे से सटीक माप, त्वरित सत्यापन और पारदर्शी प्रक्रिया का लाभ मिल रहा है। धान तौल होते ही विक्रय राशि सीधे किसानों के आधार लिंक बैंक खातों में जमा हो रही है, जिससे भुगतान को लेकर किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति नहीं रहती। उपार्जन केंद्रों में बैठने की व्यवस्था और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

किसानों का कहना है कि पूर्व में तौल में गड़बड़ी, भुगतान में देरी और बैंक में कई-कई दिनों तक भटकने जैसी समस्याएं आम थीं, लेकिन इस बार धान बिक्री से लेकर बैंक से भुगतान प्राप्त करने तक की पूरी प्रक्रिया ने उनका भरोसा बढ़ा दिया है। समय पर भुगतान मिलने से किसान अब निश्चिंत होकर रबी फसल की तैयारी, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों की योजना बना पा रहे हैं।

जिला सहकारी बैंक पाली शाखा के प्रभारी प्रबंधक रेवती रमण कश्यप ने बताया कि सरकार की नई व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और किसानों को सहकारी बैंक के माध्यम से तुरंत भुगतान मिल रहा है। बैंक में डबल काउंटर और वन-टू-वन भुगतान व्यवस्था लागू की गई है। विशेष रूप से बुजुर्ग, बीमार और महिला किसानों को प्राथमिकता देते हुए त्वरित भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। किसानों की शिकायत और सुझाव के लिए अलग काउंटर भी बनाया गया है, जहां अब तक किसी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं हुई है।

उन्होंने बताया कि जिला सहकारी बैंक पाली शाखा ऋण वसूली के मामले में पूरे जिले में दूसरे स्थान पर है। शाखा द्वारा 10 करोड़ 20 लाख रुपये का कृषि ऋण वितरण किया गया है, जिसमें से 7 करोड़ 65 लाख रुपये की वसूली भी सफलतापूर्वक की जा चुकी है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू की गई किसान हितैषी धान खरीदी और भुगतान व्यवस्था से किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है। जमीनी स्तर पर किसानों के अनुभव इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार का उद्देश्य—किसानों का आर्थिक सशक्तिकरण—सफलता की ओर अग्रसर है।

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