टमाटर की बंपर पैदावार बनी किसानों के लिए मुसीबत, 1 रुपये किलो तक गिरे दाम

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➡ “टमाटर की राजधानी” जशपुर में रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद मंडियों में दाम रसातल में
➡ मांग में भारी गिरावट, किसान लागत तक नहीं निकाल पा रहे, खेती छोड़ने की सोच रहे


🔴 टमाटर का अंधाधुंध उत्पादन बना किसानों के लिए सिरदर्द

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले को “टमाटर की राजधानी” कहा जाता है, लेकिन इस बार यहां के किसान अपनी ही फसल के कारण संकट में हैं। लुड़ेग, झिमकी, चिकनिपानी और रेडे जैसे इलाकों में टमाटर की कीमतें इतनी गिर गई हैं कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।

🛑 1 रुपये किलो में बिक रहा टमाटर, किसान परेशान

इस बार जशपुर की मंडियों में टमाटर के दाम 1 रुपये प्रति किलो तक लुढ़क चुके हैं। किसान 30-40 रुपये प्रति कैरेट (25-30 किलो) टमाटर बेचने को मजबूर हैं, जिससे उनकी मेहनत का कोई फायदा नहीं हो रहा। हालत यह हो गई है कि कई किसान अपनी फसल खेतों में ही सड़ा रहे हैं या जानवरों को खिला रहे हैं।

📉 मंडियों में सुस्ती, बाहर नहीं जा रहा टमाटर

बीते एक हफ्ते से लुड़ेग और बागबहार की टमाटर मंडियों में भारी सुस्ती देखी जा रही है। बाहरी राज्यों में आपूर्ति ठप होने के कारण टमाटर स्थानीय बाजारों में ही अटक गया है, जिससे दाम लगातार गिरते जा रहे हैं। करीब छह साल बाद पहली बार टमाटर के रेट इतने नीचे गिरे हैं।

🚜 जशपुर में 1 लाख एकड़ में होती है टमाटर की खेती

➡ जशपुर में 1 लाख एकड़ से अधिक भूमि पर टमाटर की खेती होती है।
➡ करीब 11 हजार किसान टमाटर की खेती से जुड़े हैं।
➡ ज्यादातर किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं, लेकिन इस बार भारी नुकसान हो रहा है।
➡ लागत नहीं निकलने के कारण किसान टमाटर की खेती छोड़ने की सोच रहे हैं।

❓ आखिर टमाटर की कीमतें इतनी क्यों गिरीं?

✅ स्थानीय मंडियों में मांग घटी, बाहर आपूर्ति नहीं हो पा रही।
✅ बड़ी कंपनियों और व्यापारियों की खरीदारी में कमी।
✅ टमाटर की बंपर पैदावार से बाजार में ज्यादा आपूर्ति।
✅ सरकार की ओर से समर्थन मूल्य या खरीद केंद्रों की कमी।

🚨 किसानों के सामने अब क्या विकल्प बचे?

☑ सरकार को टमाटर के लिए समर्थन मूल्य तय करना होगा।
☑ प्रोसेसिंग यूनिट और कोल्ड स्टोरेज स्थापित किए जाएं।
☑ बाहरी राज्यों में टमाटर की सप्लाई सुचारू रूप से हो।
☑ सरकार द्वारा किसानों को अनुदान और राहत पैकेज दिया जाए।

➡ जशपुर के किसान अब सरकार से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अगर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले वर्षों में टमाटर की खेती को लेकर किसान अपनी रुचि ही खो सकते हैं।

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