रायपुर। छत्तीसगढ़ के पंचायत सचिवों के लंबे संघर्ष को आखिरकार बड़ी सफलता मिली है। प्रदेश में 17 मार्च 2025 से चल रहा प्रदेशव्यापी आंदोलन अब सरकार से बनी सहमति के बाद स्थगित कर दिया गया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से सचिव संघ के प्रतिनिधिमंडल की सकारात्मक बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया।संघ के प्रांताध्यक्ष उपेन्द्र सिंह पैकरा ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि शासकीयकरण की प्रक्रिया को लेकर सरकार और पंचायत सचिव संघ के बीच सहमति बनी है। आंदोलन को फिलहाल “आगामी तिथि तक स्थगित” कर दिया गया है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
17 मार्च 2025 से छत्तीसगढ़ के पंचायत सचिव अपनी एक सूत्रीय मांग — शासकीयकरण — को लेकर आंदोलनरत थे। वर्षों से ग्रामीण इलाकों में काम कर रहे सचिवों का कहना था कि उन्हें अब भी संविदा और अस्थायी पद पर रखा गया है, जो अन्यायपूर्ण है।
सरकार और पंचायत सचिव संघ के बीच बनी प्रमुख सहमतियां
- जनवरी 2026 तक समिति अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिसके बाद शासकीयकरण की प्रक्रिया लागू की जाएगी।
- चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति के लिए अलग मार्गदर्शिका जल्द जारी होगी।
- 15 वर्ष की सेवा पूरी होने पर वेतन विसंगतियां दूर की जाएंगी।
- आंदोलन अवधि में रुके वेतन का तत्काल भुगतान किया जाएगा।
आंदोलन फिलहाल स्थगित
प्रांताध्यक्ष उपेन्द्र सिंह पैकरा ने कहा —
“यह जीत सिर्फ पंचायत सचिवों की नहीं, बल्कि हर उस कर्मठ कर्मचारी की है, जो न्याय, स्थायित्व और सम्मान के लिए लड़ रहा है। सरकार के आश्वासन का स्वागत करते हैं, और उम्मीद करते हैं कि यह समयसीमा में पूरा होगा।”
आगे की राह
अब सरकार पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि जनवरी 2026 तक रिपोर्ट पेश कर शासकीयकरण की प्रक्रिया लागू करे। पंचायत सचिवों ने साफ किया है कि अगर तय समयसीमा में ठोस पहल नहीं हुई, तो आंदोलन फिर शुरू होगा।यह आंदोलन केवल वेतन और सुविधा की लड़ाई नहीं, बल्कि ग्राम्य प्रशासन को स्थायित्व और सम्मान दिलाने का प्रयास था। सरकार और कर्मचारियों के बीच यह सहमति संवाद और समाधान की मिसाल बन सकती है — बशर्ते ईमानदारी से लागू हो।









