पोड़ी बीईओ में बाल्य देखभाल अवकाश पर सवाल: परीक्षा काल में मनमानी स्वीकृतियाँ, स्कूलों में अव्यवस्था

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पोड़ी बीईओ में बाल्य देखभाल अवकाश पर सवाल: परीक्षा काल में मनमानी स्वीकृतियाँ, स्कूलों में अव्यवस्था

शिक्षा विभाग में बाल्य देखभाल अवकाश का खेल : पोड़ी बीईओ में वार्षिक परीक्षा अवधि को नजरअंदाज कर मनमाने कर दी अवकाश स्वीकृत, कहीं शिक्षक विहीन तो कहीं शालेय कार्य प्रभावित।

 शासन- प्रशासन के निर्देश को दिखाया ठेंगा.

 

कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा: जिले के पोड़ी उपरोड़ा खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में बीते कुछ महीनों से शिक्षिकाओं को मिलने वाले बाल्य देखभाल अवकाश (सीसीएल) में खेल चल रहा है। जिले के संबंधित उच्चाधिकारी अथवा जिला प्रशासन को इस बाबत जानकारी है अथवा नही, किंतु एन वार्षिक परीक्षा के समय सुविधा शुल्क से चलने वाले इस खेल में मनमाने अवकाश स्वीकृत कर दी गई है।

विभागीय पुष्ट सूत्रों से छनकर आयी जानकारी के मुताबित पोड़ी उपरोड़ा खण्ड शिक्षाधिकारी कार्यालय में गत कुछ महीनों से विभागीय कई मामलों में तय प्रक्रिया का पालन नही किया जा रहा और मनमाने कार्यप्रणाली को अंजाम दिया जा रहा है। कुछ इसी प्रकार बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिकाओं को मातृत्व अवकाश के साथ चिकित्सकीय व बाल्य देखभाल अवकाश मिलता है। बच्चों की देखभाल के लिए मिलने वाला चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) को लेकर पोड़ी बीईओ में बीते कुछ महीनों से आरोप लग रहे है। आरोप है कि यह अवकाश वास्तविक रूप से आवश्यकता वाले शिक्षिकाओं को मुश्किल से मिल पाता है, तो कई शिक्षिकाएं सुविधा शुल्क के आधार पर आसानी से पा लेती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सीसीएल की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है। इसके तहत इस अवकाश को पहले प्रधानाध्यापक, फिर खण्ड शिक्षा अधिकारी और फिर जिला मुख्यालय के आदेश से प्रदान किया जाता है। दूसरी ओर परीक्षा या अतिआवश्यक सेवा चुनाव, एसआईआर जैसे कार्य के समय शासन द्वारा किसी भी तरह के अवकाश प्रतिबंधित किया गया है। इसकी आदेश डीपीआई द्वारा भी प्रसारित किया गया है, जिसमे जिला कलेक्टर के अनुमोदन से ही किसी भी प्रकार के अवकाश स्वीकृत करने निर्देशित है। अमूमन एक बार मे 89 से 90 दिन तथा पूरे सेवाकाल में 2 वर्ष का बच्चों के लिए बाल्य देखभाल अवकाश मिलता है। 18 वर्ष का बच्चा होने तक यह अवकाश अलग- अलग अवधि में लिया जा सकता है। लेकिन ऑनलाइन प्रक्रिया होने के बाद भी इसमें मनमानी जारी है। जिसमे पोड़ी उपरोड़ा खण्ड शिक्षाधिकारी कार्यालय से थोक में बाल्य देखभाल अवकाश स्वीकृत कर दिए गए और जिसमे यह भी नही देखा गया कि कहीं शाला शिक्षक विहीन तो कहीं शालेय कार्य प्रभावित हो चला है। सुविधा शुल्क लेकर जिन शिक्षिकाओं को चाइल्ड केयर लीव अवकाश दिया गया है उनमें से सेन्हा संकुल अंतर्गत प्राथमिक शाला सेंदूरगार की दो शिक्षिका, जिसमे श्रीमती रूपा अनंत को 29 दिसंबर 2025 से 27 मार्च 2026 तक, श्रीमती पी शशि को 05 जनवरी 2026 से 28 मार्च 2026 तक, इसी तरह प्राथमिक शाला कुदरी के भी दो शिक्षिका में श्रीमती माया शर्मा को 10 अक्टूबर 2025 से 10 जनवरी 2026 तक, श्रीमती पुष्पा कुमारी को 27 जनवरी 2026 से 01 अप्रैल 2026 तक व प्राथमिक शाला कुकरी बहरा की शिक्षिका श्रीमती विमला यादव को 17 नवंबर 2025 से 14 फरवरी 2026 तक संतान पालन अवकाश स्वीकृत किया गया है। इस अवकाश में प्राथमिक शाला सेंदूरगार की दो शिक्षिकाओं को एक साथ अवकाश दे दिया गया, जिससे बच्चों का पठन- पाठन कार्य काफी प्रभावित हुआ है। वही प्राथमिक शाला कुदरी की एक शिक्षिका का अवकाश अवधि समाप्ति पश्चात इसी शाला की दूसरी शिक्षिका का अवकाश स्वीकृत कर दिया गया। यह न केवल अध्यापन कार्य प्रभावित कर रहा, बल्कि बच्चों के वार्षिक परीक्षा पर भी इसका विपरीत असर पड़ने को लेकर नकारा नही जा सकता। सीसीएल की आड़ में चल रहे इस खेल को जिला प्रशासन को गंभीरता से लेने की जरूरत है, ताकि इस मनमानीं पर अंकुश लग सके और स्कूली बच्चों का भविष्य दांव पर न लगने पाए।

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