महाकुम्भ में आँखों की चिकित्सा सेवा का अद्वितीय कीर्तिमान, नेत्रकुम्भ-2025

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हिन्दू धर्म-संस्कृति और उसके आध्यात्मिक दिव्य प्रकाश को भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व के कोने-कोने तक विस्तारित करने का कार्य इस बार के भव्य-दिव्य महाकुम्भ ने किया है।

तीर्थराज प्रयाग की पावन धरती पर आयोजित महाकुम्भ में अनेक सेवा कार्यों ने सम्पूर्ण विश्व का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया । उन्हीं सेवा कार्यों में आँखों के स्वास्थ्य सुधार का एक अद्वितीय अनुकरणीय आयोजन हो रहा था। नेत्रकुम्भ-2025, जो अपने समापन के साथ ही कीर्तिमान बनाने में सफल रहा।

यह महान सेवा यज्ञ दिव्यांगों के सशक्तीकरण हेतु समर्पित राष्ट्रीय संगठन सक्षम के नेतृत्व में अनेक सेवाभावी संगठनों के सहयोग से यशस्वी रहा। यह आयोजन 05 जनवरी से प्रारम्भ होकर 27 फरवरी पर्यन्त गतिमान रहा।

वास्तव में प्रथमत: नेत्रकुम्भ की परिकल्पना 2019 में प्रयागराज की पावन धरा पर आयोजित अर्द्ध कुम्भ के अवसर पर आकार लेने लगी ।
हमारे देश में आँखों के स्वास्थ्य को लेकर बहुत गंभीर चुनौती खड़ी हो रही है। सम्पूर्ण देश के बारे में विचार करें तो 01 करोड़ 25 लाख भाई बहन पूरी तरह से दृष्टिबाधित या लो-विजन के शिकार है और इस बड़ी संख्या में 15 लाख के आस-पास ऐसे लोग हैं जो कोर्निया की खराबी के कारण से देख नहीं पाते। हमारे देश के लोगों में श्रद्धा भक्ति भावनात्मक लगाव बहुत है।

लेकिन दुर्भाग्य से जागरूकता की बहुत कमी होने के कारण नेत्रदान जितना चाहिए उतना नहीं हो रहा है इस दृष्टि से सम्पूर्ण देश में एक बड़ा जनजागरण क्योंकि दृष्टिबाधित लोगों की संख्या और न बढ़े और जो दूर किया जा सकने वाला अंधत्व है उस पर भी ठीक से सभी आँखों के चिकित्सालय मिलकर काम करें क्योंकि अपने देश में पचास करोड़ से अधिक लोग ऐसे हैं जिनको चश्मा ही चाहिए अत: आँखों के स्वास्थ्य के बारे में इन्हीं सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए नेत्रकुम्भ की रचना मूर्त रूप लेने लगी प्रारम्भ में माननीय सह सरकार्यवाह परम आदरणीय डाॅ. कृष्णगोपाल जी की प्रेरणा से इसकी व्यापक योजना-रचना बनी परिणामस्वरूप प्रथम नेत्रकुम्भ आशातीत सफल रहा। 2 लाख से अधिक लोगों के नेत्र जाँच करने का अवसर मिला और 1 लाख 55 हजार से अधिक अपने भाई-बहिनों को निःशुल्क दवा व चश्मा देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । पहले आयोजन की अद्भुत सफलता के परिणामस्वरूप प्रत्येक कुम्भ के शुभ अवसर पर यह सेवा कार्य सुनिश्चित हो गया ।

सन् 2021 में कोरोना की भीषण महामारी के शुरुआत में ही हरिद्वार के पावन धरा पर माँ गंगा की गोद में अर्द्ध कुम्भ प्रारम्भ हुआ। अस्थाई निर्माण की अनुमति न होने से छोटे-छोटे 8 नेत्र जाँच केन्द्र प्रारम्भ किए गए लेकिन मेला अपने पूरे उफान पर आने से पूर्व ही समाप्ति की घोषणा हो गई । विपरीत परिस्थितियों में भी 50 हजार श्रद्धालुओं के नेत्रों की जाँच सम्भव हुई तथा 38 हजार लोगों को निःशुल्क दवा व चश्मा प्रदान किया गया।

इस बार गंगा,यमुना व सरस्वती मैया की कृपा से लाखों लोगों के नेत्रों की चिकित्सा का सौभाग्य प्राप्त हुआ जिसमें – निःशुल्क नेत्र जाँच, दवा, चश्मा व ऑपरेशन की विशेष सुविधा प्रदान की गई जिसके अन्तिम आँकड़े इस प्रकार है।
1.कुल दिवस – 53
2.सहयोगी संस्थाएं – 52
3.नेत्र चिकित्सक – 343
4.ऑप्टोमेट्रिस्ट्स – 489
5.प्रबन्धक – 2700
6.नेत्र जाँच लाभार्थी – 2,37,964
7.चश्मा व दवा वितरण – 1,63,652
8.मोतियाबिन्द ऑपरेशन – 17,069

इस बार के नेत्रकुम्भ में आँखों की जाँच के अतिरिक्त भी कुछ विशेष उल्लेखनीय कार्य सम्पन्न हुए-
1.पूरे समय 2 OPD युनिट डायबिटीज की जाँच की भी चली उन्हें दवा के साथ-साथ खानपान व योग्य दिनचर्या हेतु उचित मार्गदर्शन दिया गया ।
2.अत्याधुनिक मशीन द्वारा 10 मिनिट में ब्लड सैंपल के माध्यम से 50 से भी अधिक प्रकार की रिपोर्ट दी जा रही थी ।
3.सामान्य जाँच हेतु भी 2 OPD युनिट का संचालन हुआ ।
4.सैंकड़ों लोगों ने नेत्र दान का संकल्प भरकर दृष्टिबाधितों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया ।
5.मुँह के केंसर की जाँच के लिए भी 2 OPD युनिट का संचालन हुआ ।
6.दृष्टिबाधित दिव्यांग बन्धु-भगिनियों के जीवन को सुगम्य करने के उद्देश्य से AI लेस स्मार्ट विजन ग्लास ज्योति व स्मार्ट केन (छड़ी) सारथी स्मार्ट फोन के साथ वितरित किया गया ।
कुछ दृष्टिबाधितों को रोलर युक्त छड़ी भी प्रदान की गई।
7.दृष्टिबाधित दिव्यांगों द्वारा सुमधुर सुन्दरकाण्ड, भजन कीर्तन व कविता पाठ का आयोजन हुआ ।

इस सम्पूर्ण आयोजन में महत्वपूर्ण सहयोग निम्न संस्थाओं का रहा, जिनके समर्पण के कारण ही यह नेत्रकुम्भ यशस्वी हुआ।
1.उत्तर प्रदेश सरकार
2.द हँस फाउंडेशन, उत्तराखण्ड
3.श्री रणछोड़दास बापु जी चैरिटेबल अस्पताल, राजकोट
4.ईस्काॅन, श्री गोवर्धन इको विलेज पालघर, मुम्बई
5.राष्ट्रीय सेवा भारती
6.नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन
7.स्वामी विवेकानन्द हेल्थ मिशन, उत्तराखण्ड
8.श्री रज्जु भैया सेवा न्यास, प्रयागराज
9.श्री भाऊराव देवरस न्यास, लखनऊ
ईत्यादि।

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