शासकीयकरण की मांग को लेकर पंचायत सचिवों की कलमबंद हड़ताल जारी, गांवों की व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित – सरपंचों को नहीं मिला कार्यभार

Spread the love

कोरबा। पंचायत सचिवों के शासकीयकरण की मांग को लेकर जिले की समस्त ग्राम पंचायतों में कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है। पंचायत सचिव अनिश्चितकालीन हड़ताल पर अडिग हैं और कार्यालयों में ताले लटके हैं। वहीं नवनिर्वाचित सरपंचों को अब तक कार्यभार नहीं सौंपा गया, जिससे गांवों की मूलभूत सेवाएं—जैसे पेयजल, साफ-सफाई, पेंशन वितरण, मनरेगा, पीएम आवास, प्रमाणपत्र जैसे कार्य बुरी तरह चरमरा गए हैं।

सरकार से सकारात्मक निर्णय की ग्रामीणों को अपेक्षा

ग्रामीण लगातार समस्याओं से जूझ रहे हैं। नल जल योजना ठप पड़ी है, पंचायतों में गंदगी का अंबार लगा है और सरकारी योजनाएं पूरी तरह रुक गई हैं। लोग अपनी समस्याएं लेकर सरपंचों के पास पहुंच रहे हैं, लेकिन सरपंचों के पास अधिकार न होने के कारण वे असहाय हैं। पंचायत सचिवों की हड़ताल और वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव अब ग्रामीणों की दिनचर्या पर भारी पड़ने लगा है।

“मोदी की गारंटी” के वादे पर सचिव अडिग

पंचायत सचिव संघ ने केंद्र सरकार पर वादा निभाने का दबाव बनाया है। सचिवों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान “मोदी की गारंटी” में पंचायत सचिवों को शासकीयकरण का वादा किया गया था, जिसे भाजपा ने अपने घोषणापत्र में भी शामिल किया था। सरकार बनने के 100 दिन में वादा पूरा करने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक 400 दिन गुजर चुके हैं और कोई ठोस पहल नहीं हुई है।

सचिवों का आरोप है कि सिर्फ समितियां बनाकर उन्हें गुमराह किया जा रहा है। लेकिन इस बार वे समिति के “झांसे” में नहीं आएंगे और जब तक शासकीयकरण की अधिसूचना जारी नहीं होती, वे अपनी हड़ताल वापस नहीं लेंगे।

सरपंच भी असहाय, पंचायतें ठप

सरपंचों का कहना है कि शपथ ग्रहण के बाद अब तक उन्हें कार्यभार नहीं सौंपा गया है, जिससे वे अपने गांवों की जिम्मेदारियां नहीं निभा पा रहे। पंचायत सचिवों की अनुपस्थिति और शासन की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण आमजन की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीण पंचायत और सरपंच के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें कोई समाधान नहीं मिल रहा।

ग्रामीणों की सरकार से अपील

इस संकट के बीच ग्रामीणों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि जब तक सचिवों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक गांवों की स्थिति सामान्य नहीं हो सकती। ऐसे में शासन-प्रशासन को जल्द हस्तक्षेप कर इस गंभीर समस्या का समाधान निकालना चाहिए।

Related Posts

खेत में बैल चराते समय दर्ज कराई शिकायत, प्रशासन ने घर पहुंचकर खुलवाया बैंक खाता और बनवाया किसान क्रेडिट कार्ड

Spread the love

Spread the love  छत्तीसगढ़ विशेष रिपोर्ट।     रायपुर/छत्तीसगढ़ 16 जून 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित…

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से विभिन्न संत-महात्माओं ने की सौजन्य भेंट, आध्यात्मिक शिक्षा को बढ़ावा देने के निर्णय पर जताया आभार

Spread the love

Spread the love  रायपुर/विशेष रिपोर्ट।       रायपुर 16 जून 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर श्री स्वामी राजीव…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!