कोरबा/पाली विशेष रिपोर्ट।
कोरबा/पाली। नगर पंचायत पाली में पिछले वर्ष भारी बारिश के दौरान पत्ता गोदाम क्षेत्र सहित मुख्य मार्ग किनारे घरों और दुकानों में घुसे पानी से हुए भारी नुकसान की यादें अभी भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। ऐसे में 105.32 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत जलनिकासी योजना का नाली निर्माण कार्य अधूरा होने से नगरवासियों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। बारिश के बीच निर्माण स्थल पर जगह-जगह खोदे गए बड़े गड्ढे और धीमी रफ्तार से चल रहा काम भविष्य में फिर जलभराव की आशंका को जन्म दे रहा है।
जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष भारी बारिश के दौरान जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी, जिससे पत्ता गोदाम क्षेत्र के घरों और दुकानों में पानी भर गया था। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि आक्रोशित नागरिकों ने पाली से गुजर रहे उप मुख्यमंत्री के काफिले को रोककर सड़क जाम कर दिया था। मौके पर उप मुख्यमंत्री ने समस्या के स्थायी समाधान का आश्वासन दिया था।
इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से 105.32 लाख रुपये की लागत से बायपास से मुख्य मार्ग तक लगभग 3/8 किलोमीटर क्षेत्र में पुल एवं नाली निर्माण कार्य को मंजूरी दी। इस परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (PWD) को सौंपी गई।
निर्माण कार्य के तहत पुल का निर्माण लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण नाली निर्माण अभी तक 40 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो पाया है। कई घरों और दुकानों के सामने बड़े-बड़े गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
स्थानीय व्यापारियों और रहवासियों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में तेज बारिश हुई तो अधूरी नाली और खुले गड्ढों के कारण पानी की निकासी बाधित होगी और पिछले साल जैसी स्थिति दोबारा बन सकती है। उनका आरोप है कि ठेकेदार की सुस्त कार्यशैली के कारण निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन बारिश के दौरान इस महत्वपूर्ण जलनिकासी परियोजना को समय पर पूरा कर पाएगा, या फिर पाली के लोगों को एक बार फिर जलभराव और नुकसान का सामना करना पड़ेगा? नगरवासियों की निगाहें अब प्रशासन और निर्माण एजेंसी की कार्यशैली पर टिकी हुई हैं।







