स्वस्थ जीवन के 31 अमूल्य सूत्र: आयुर्वेदिक जीवनशैली की ओर एक कदम

Spread the love

1. प्रतिदिन सूर्योदय से पहले उठे। रात को कभी देर से ना सोए।

2. मालिश से शरीर पुष्ट होता है। शरीर की मांसपेशियों को बहुत बल मिलता है। इसलिए कम से कम एक बार सप्ताह में मालीश जरूर करें।

3. जो लोग बूढ़े हो गए हैं या बहुत अधिक व्यायाम नहीं कर सकते उन्हें कम से कम सुबह शाम टहलना जरूर चाहिए। टहलने से सारे शरीर की मांसपेशियों का व्यायाम होता है और रक्त का संचार बहुत अच्छे तरीके से होता है और व्यक्ति हृदय रोग, अस्थमा, हाई कोलस्ट्रोल, हाई बीपी, लो बीपी आदि बीमारियों से बच जाता है।

4. धूप, ताजी हवा, स्वच्छ वातावरण, प्राकृतिक वातावरण यह हमारे शरीर को जरूर मिलना चाहिए।

5. सात्विक भोजन ही निर्मल मन की खुराक होता है। कहावत भी है जैसा खाए अन्न वैसा होगा मन। इसलिए हमेशा सात्विक आहार आहार लेना चाहिए

6. सात्विक आहार में प्राकृतिक भोजन आता है जैसे कि ताजे फल दूध दही देसी घी मक्खन गेहूं चना बाजरे की रोटी हरी सब्जियां दालें।

7. लाल मिर्च गरिष्ठ भोजन मिर्च मसालों का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। इससे हमारे शरीर की लीवर को, आंतों को,किडनी को अतिरिक्त श्रम करना पड़ता है उसको पचाने के लिए।

8. हमें प्रतिदिन योग और व्यायाम करना चाहिए इससे व्यक्ति की आयु लंबी होती है और व्यक्ति रोगों से मुक्त होता है |

9. गर्म जल से कभी भी स्नान नहीं करना चाहिए इससे व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।

10. स्नान के बाद तोलिए को त्वचा से अच्छी तरह से रगड़ ना चाहिए ताकि त्वचा के सभी रोम छिद्र खुल जाए।

11. हमें अपनी जीभ पर नियंत्रण रखना चाहिए। स्वाद के लिए नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए खाने को प्राथमिकता देनी चाहिए

12. पानी को घूट घूट करके पिए जिससे कि पानी के साथ साथ अधिक से अधिक लार हमारे शरीर को मिले। लार हमारे शरीर के लिए बहुत लाभदायक है। यह भोजन को पचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है

13. रात को दूध पीना सर्वोत्तम माना गया है। यह नाड़ी की गति को धीमी कर देता है जिससे शरीर की मांसपेशियों को आराम मिलता है और नींद अच्छी आती है।

14. भोजन के पश्चात हमें दांतो को अच्छे से साफ करना चाहिए ताकि वहां पर चिपकी हुई भोजन के अंश निकल जाए। जिससे कि दांतों में कीड़ा ना लग सके। दूसरा भोजन के अंश के कारण वहां बदबू और सड़न पैदा हो जाती है।

15. प्रतिदिन तुलसी की पत्तियां खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और ज्वर नहीं होता।

16. वैसे तो दिन में नहीं सोना चाहिए लेकिन गर्मियों के दिनों में भोजन के पश्चात आधा घंटा तक विश्राम कर सकते हैं।

17. कम बोलना बहुत अच्छी आदत है। इससे मन शांत और प्रसन्न रहता है। जहां जरूरी हो वही बोलना चाहिए।

18. चिंता चिता के समान है। चिंता करने से शरीर की बहुत हानि होती है। इसलिए चिंता नहीं चिंतन करना चाहिए।

19. प्रतिदिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

20. रात को एक चम्मच त्रिफला आधा गिलास पानी में भिगोकर रखते हैं सुबह उठकर उस पानी को छानकर अपनी आंखों को उस पानी से धोएं। इससे आंखों की रोशनी तेज होती है व मोटापा कम होता है ।

21. मुंह धोते समय मुंह में ठंडा जल मुंह में भरकर आंखों पर 15 से 20 बार ठंडे जल के छींटे लगाने से आंखों की रोशनी तेज होती है।

22. बिस्तर को तकिए को चादर आदि को समय-समय पर धूप लगाते रहना चाहिए जिससे कि उनमें बैक्टीरिया पैदा नहीं होता और ऐसा होने से खुजली चर्म रोग आदि रोग नहीं हो पाते।

23. मच्छरों से बचने के लिए मॉस्किटो कॉइल का प्रयोग करना सही नहीं है। केमिकल युक्त पदार्थ और धूआ सेहत के लिए बहुत ही नुकसानदायक है।

24. हवन करने से घर का वातावरण पवित्र होता है और यह हानिकारक गैसों को खत्म करता है प्रदूषण को खत्म करता है इसलिए हवन करते रहना चाहिए।

25. श्वास सदा नाक से लेना चाहिए मुंह से कभी भी नहीं लेना चाहिए। मुंह से सांस लेने से आयु कम होती है।

26. हमेशा अच्छी किताबों को पढ़ते रहना चाहिए। इससे हमारे विचार उत्तम होते हैं। आत्मविश्वास जगता है और चुनौतियों का सामना करने की शक्ति आती है।

27. रात को तांबे के पात्र में रखा हुआ पानी सुबह पीना सेहत के लिए बहुत ही अच्छा है।

28. विटामिन डी की कमी से बचने के लिए धूप में हमेशा बैठना चाहिए। यह प्राकृतिक रूप से हमारे शरीर को विटामिन डी देता है। जिससे कैल्शियम को ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है।

29. मैदे की बनी हुई चीजों को बिल्कुल त्याग दें। मैदे की बनी हुई चीज में किसी भी प्रकार का पोषक तत्व नहीं होता उल्टा यह कब्ज रोग पैदा कर देती है।

30. उपवास करने का अर्थ यह नहीं है कि बार-बार खाते रहना चाहिए। उपवास फलाहारी होना चाहिए अर्थात उसमें सिर्फ फल ही फल हो। अगर नींबू पानी का केवल उपवास रखते हैं तो वह सोने पर सुहागा है। अर्थात उपवास में सिर्फ नींबू पानी पीना है।1 हफ्ते में कम से कम एक बार उपवास जरूर करना चाहिए।

31. जिन व्यक्तियों की उम्र 50 से ऊपर हो चुकी है उनको खाना कम कर देना चाहिए 50 की उम्र के बाद हमारे शरीर को ज्यादा खाने की आवश्यकता नहीं होती ऐसे व्यक्तियों को अन्न सिर्फ एक समय खाना चाहिए और बाकी समय फल दूध दही आदि का ग्रहण करना चाहिए।

Related Posts

दर्दनाक हादसा: प्रोफेसर बनने का सपना अधूरा… पंजाब यूनिवर्सिटी की पीएचडी स्कॉलर ज्योति की संदिग्ध मौत, कैंपस सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

Spread the love

Spread the love        एक किसान परिवार की होनहार बेटी, जिसने मेहनत और प्रतिभा के दम पर बीएड, NET-JRF और CTET जैसी परीक्षाएं पास कर पीएचडी तक का…

15 साल पुराने पुलिस हिरासत मौत मामले में ऐतिहासिक फैसला: थाना प्रभारी समेत 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद

Spread the love

Spread the love    वाशिम (महाराष्ट्र) विशेष रिपोर्ट।         वाशिम (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र के वाशिम जिले में वर्ष 2011 में हुई पुलिस हिरासत में मौत के चर्चित मामले…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!