दिल्ली के लाल किला के पास 10 नवंबर की शाम हुए कार ब्लास्ट मामले में जांच एजेंसियों को बड़ा सुराग मिला है। ब्लास्ट में मिली हुंडई i20 कार के अंदर पाए गए शव के DNA टेस्ट की रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि वह शव आतंकी डॉ. उमर का ही था। DNA रिपोर्ट में शव के अवशेष उमर की मां और भाई के सैंपल से 100 प्रतिशत मैच कर गए हैं।
जांच में पता चला है कि धमाके के समय कार को खुद डॉ. उमर चला रहा था। यह वही उमर है जो फरीदाबाद में पकड़े गए टेरर मॉड्यूल का हिस्सा था। सूत्रों के मुताबिक, उमर ने यह कार खुद खरीदी थी और उसे धमाके के लिए इस्तेमाल किया। इस विस्फोट में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है और 24 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, दिल्ली ब्लास्ट का हैंडलर “UKASA” तुर्की के अंकारा में बैठा था, जो सेशन ऐप (Session App) के जरिए उमर और उसके साथियों से संपर्क में था। यह ऐप एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड है, जिससे आतंकियों का लोकेशन और चैट ट्रेस करना मुश्किल होता है।
सूत्रों का कहना है कि उमर का ब्रेनवॉश मार्च 2022 में अंकारा (तुर्की) में किया गया था। वहीं से वह कट्टरपंथ की राह पर चला गया। भारत लौटने के बाद उसने जम्मू-कश्मीर के संबूरा (पुलवामा) गांव में सक्रिय टेरर मॉड्यूल से जुड़कर दिल्ली, फरीदाबाद और अन्य शहरों में नेटवर्क फैलाया।
पुलिस और खुफिया एजेंसियों की लगातार दबिश के कारण उमर घबराहट में आत्मघाती हमलावर (Suicide Attacker) बन गया। उसने धमाके के दिन कार में ही विस्फोटक सक्रिय कर खुद को उड़ा लिया। जांच में यह भी सामने आया है कि उमर का परिवार जानता था कि वह कट्टरपंथ की राह पर जा चुका है, लेकिन उन्होंने इस बारे में पुलिस को जानकारी नहीं दी थी।









