नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित दो हजार करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाले में फंसे आबकारी विभाग के अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान सभी आरोपी अधिकारियों को जरूरी शर्तों के साथ स्थायी जमानत प्रदान कर दी।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की डिवीजन बेंच ने कहा कि सभी आरोपी दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में अपना पासपोर्ट जमा करेंगे और राज्य की सीमाओं से बाहर जाने से पहले अदालत से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की गैर-हाजिरी या जांच में असहयोग को जमानत शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा, जिससे जमानत रद्द की जा सकती है।
जांच में सहयोग अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा कि सभी अधिकारी जांच अधिकारी के बुलावे पर उपस्थित रहेंगे और यदि जांच के दौरान अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल की जाती है, तो उसका पूरा सहयोग करना होगा। साथ ही, प्रत्येक याचिकाकर्ता को अपना मोबाइल नंबर जांच एजेंसी को उपलब्ध कराना होगा ताकि जरूरत पड़ने पर उनसे तुरंत संपर्क किया जा सके।
कवासी लखमा की याचिका पर दो सप्ताह बाद सुनवाई
इसी मामले में आरोपी पूर्व आबकारी मंत्री और कोंटा विधायक कवासी लखमा की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट दो सप्ताह बाद सुनवाई करेगा।
क्या है पूरा मामला
वर्ष 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में करीब 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले का खुलासा हुआ था। आरोप है कि आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने शराब सिंडिकेट के साथ मिलीभगत कर अवैध बिक्री से भारी कमीशन वसूला। इस मामले की जांच ईडी और ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही है।









