दिल्ली के लालकिले बम धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सुरक्षा एजेंसियों के हाथ ऐसे कई चौंकाने वाले सुराग लग रहे हैं जो जैश-ए-मोहम्मद और हमास के बीच गहरे तालमेल की ओर इशारा करते हैं। NIA को मिले कुछ वीडियो यह साबित करते हैं कि दोनों आतंकी संगठनों के बीच संपर्क केवल वैचारिक नहीं, बल्कि संचालन स्तर पर भी सक्रिय था। अधिकारियों के मुताबिक, इस साजिश की नींव फरवरी में रखी गई थी और अब पूरा मॉड्यूल उजाले में आ रहा है।
हमास की रणनीति पर काम कर रहा था जैश का नेटवर्क
जांच से पता चला है कि जैश का व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क हमास की रणनीति की हूबहू नकल कर रहा था।
- ड्रोन के जरिए हथियार भेजना,
- अस्पतालों को हथियार छिपाने के ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करना,
- और मॉड्यूल का कश्मीर से हरियाणा तक फैला होना,
ये सभी तरीके हमास की कार्य पद्धति से मेल खाते हैं।
एजेंसियों का कहना है कि इन समानताओं को महज ‘संयोग’ नहीं माना जा सकता।
पाक अधिकृत कश्मीर में मंच साझा करना बना बड़ा संकेत
जांच में एक और बड़ा खुलासा यह है कि 5 फरवरी को POK के रावलकोट में हमास नेता
- डॉ. खालिद कद्दौमी
- और डॉ. नाजी ज़हीर
ने जैश और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों के साथ एक ही मंच पर भाग लिया था।
सुरक्षा एजेंसियां इसे वैश्विक आतंकी गठजोड़ की शुरुआत के संकेत के रूप में देख रही हैं।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी मॉड्यूल में घबराहट, कई कर्मचारी लापता
अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े मॉड्यूल के सामने आने के बाद कई डॉक्टर और कर्मचारी अचानक गायब हो गए हैं।
एजेंसियां उनके लॉकर और निजी सामान की बारीकी से जांच कर रही हैं।
अब तक बरामद हुए कई मोबाइल फोन और टैबलेट की साइबर फॉरेंसिक जांच तेज कर दी गई है। इससे मॉड्यूल की पूरी संपर्क श्रृंखला ट्रेस की जा रही है।
फरीदाबाद–नूंह में केमिकल सप्लाई की पड़ताल
धौज और फतेहपुर तगा इलाकों में संदिग्ध विस्फोटक मिलने के बाद स्थानीय पुलिस भी सक्रिय हो गई है। पूछताछ में आरोपियों ने माना कि अमोनियम नाइट्रेट जैसे संवेदनशील केमिकल फरीदाबाद एवं नूंह के बाजारों से खरीदे गए थे।
अब सुरक्षा एजेंसियां खाद की दुकानों, थोक केमिकल विक्रेताओं और सप्लाई चेन की विस्तृत जांच कर रही हैं।










