आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस ने दिल्ली के टर्मिनल-3 पर एक बड़ा फर्जी वीज़ा रैकेट उजागर किया है। यह रैकेट तमिलनाडु स्थित था और भारतीय नौकरीपेशा युवाओं को नकली French D-type वीज़ा दिलाकर विदेश भेजने की कोशिश कर रहा था।
28 अक्टूबर को इमिग्रेशन जांच के दौरान तीन यात्रियों—नवीराज सुब्रमणियम, मोहन गांधी इलंगोवन और प्रभाकरण सेंथिलकुमार—के पास से संदिग्ध वीज़ा मिले। प्राथमिक जांच में वीज़ा में सुरक्षा फीचर्स न होने और फर्जी पाए जाने पर IGI एयरपोर्ट थाने में मामला दर्ज किया गया।
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि नवीराज को उसके भाई ने 6 लाख रुपये देकर फर्जी वीज़ा दिलवाया था, जबकि बाकी दो यात्रियों ने तमिलनाडु के नमक्कल जिले के एजेंट को 12–12 लाख रुपये दिए थे।
रैकेट का पता चलते ही SHO की अगुवाई में टीम ने जांच शुरू की। तकनीकी निगरानी और स्थानीय इनपुट के आधार पर पुलिस ने नमक्कल के 55 वर्षीय एजेंट वी. कन्नन को गिरफ्तार किया। कन्नन ने कबूल किया कि वह परमाथी में सरकारी ITI संचालित करता है और वेलुर में “Vetri Overseas” नाम से एजुकेशन कंसल्टेंसी चलाता है। वह अपने साथी साथिक सैयद उर्फ अब्दुल हकीम के साथ युवाओं को पेरिस में वेयरहाउस नौकरी का झांसा देकर ठगता था।
पुलिस के अनुसार अब तक कम से कम 16 युवाओं को फर्जी इंटरव्यू और वीज़ा के माध्यम से ठगा गया। जांच जारी है और फरार साथी एजेंट की तलाश के साथ यह पता लगाया जा रहा है कि रैकेट के संबंध अन्य राज्यों या पुराने मामलों से तो नहीं हैं।









