तमनार हिंसा पर सियासत और सख़्ती के बीच संतुलन की मांग—उमेश पटेल व विद्यावती सिदार ने कहा, बेगुनाहों पर न पड़े पुलिसिया शिकंजा

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रायगढ़ | 6 जनवरी 2026 तमनार में जनसुनवाई के विरोध के दौरान हुई हिंसक झड़प अब पुलिस जांच के दायरे में है। घटनाक्रम के बाद पुलिस ने अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी बीच पूर्व मंत्री व खरसिया विधायक उमेश पटेल तथा लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार प्रभावित गांवों के ग्रामीणों और आंदोलन में शामिल महिलाओं के साथ पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल से मिले। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट शब्दों में मांग रखी कि कार्रवाई साक्ष्यों पर आधारित हो और किसी भी निर्दोष को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित न किया जाए।

बताया गया कि 27 दिसंबर को धरना-प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़े और हिंसक झड़प में महिला आरक्षक के साथ अमानवीय कृत्य की घटना सामने आई। इस गंभीर मामले में पुलिस अब तक मुख्य आरोपी सहित छह लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं ग्रामीणों पर दर्ज एफआईआर को लेकर क्षेत्र में असंतोष भी देखा जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस विधायकों ने एसपी से मुलाकात कर जांच की दिशा और कार्रवाई की कसौटी पर चर्चा की।

लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार ने कहा कि घटना के समय ग्रामीणों के बीच कुछ बाहरी और असामाजिक तत्वों की मौजूदगी की बात सामने आई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच जरूरी है ताकि वास्तविक दोषियों तक पहुंचा जा सके। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आंदोलन में शामिल महिलाओं और ग्रामीणों को सामूहिक रूप से आरोपी मानना न्यायसंगत नहीं होगा।

पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि बिना ठोस साक्ष्य के किसी पर भी कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि हर एफआईआर की गहन छानबीन होगी और जो लोग दोषी पाए जाएंगे, उन्हीं के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने बातचीत के बाद कहा कि तमनार में जो बड़ा घटनाक्रम हुआ, उसमें कई ऐसे नाम सामने आ रहे हैं जो मौके पर मौजूद ही नहीं थे। “हम यह सुनिश्चित कराने आए हैं कि जो घटना में शामिल नहीं थे, उन पर केस न बने। ऐसी परिस्थितियों में व्यक्तिगत रंजिश के चलते लोगों को फंसाने की कोशिशें होती हैं, इसे रोका जाना चाहिए,” उन्होंने कहा। पटेल ने यह भी जोड़ा कि यदि समय रहते प्रशासन और सत्ता पक्ष के जिम्मेदार लोग ग्रामीणों से संवाद बनाए रखते, तो हालात को बिगड़ने से रोका जा सकता था।

तमनार प्रकरण अब केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और संवादहीनता का भी आईना बनता दिख रहा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और कार्रवाई की निष्पक्षता ही तय करेगी कि यह मामला विश्वास बहाली की ओर बढ़ता है या तनाव और गहराता है।

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