सुप्रीम कोर्ट से ममता सरकार को झटका, ईडी अधिकारियों पर FIR पर रोक

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नई दिल्ली  I-PAC छापेमारी मामले में पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने अगली सुनवाई तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच कराने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी को जिन परिसरों में तलाशी ली गई थी, वहां की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि ईडी की याचिका में राज्य सरकार द्वारा कथित हस्तक्षेप से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं, जिनकी जांच जरूरी है।

ममता बनर्जी और डीजीपी को नोटिस
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी राजीव कुमार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस राजनीतिक परामर्श देने वाली कंपनी I-PAC के कार्यालय और इसके संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर ईडी की छापेमारी के दौरान कथित हस्तक्षेप को लेकर जारी किया गया है।

पीठ ने ईडी की ओर से सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर भी ममता बनर्जी और डीजीपी से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि ईडी की याचिकाओं में कई गंभीर सवाल सामने आए हैं।

हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो पाई
सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले ईडी ने 9 जनवरी को कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ममता बनर्जी के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट परिसर में भारी हंगामे के कारण सुनवाई नहीं हो सकी थी।

सुप्रीम कोर्ट में ईडी की दलील
ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि यह मामला बेहद चौंकाने वाला पैटर्न दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं केंद्रीय एजेंसियों को हतोत्साहित करेंगी और राज्य सरकारों को गलत संदेश जाएगा।

मेहता ने आरोप लगाया कि I-PAC कार्यालय में आपत्तिजनक सामग्री मौजूद थी और छापेमारी के दौरान राज्य मशीनरी का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान भीड़ जुटाकर न्यायिक प्रक्रिया को बाधित किया गया।

“क्या हाईकोर्ट को जंतर-मंतर बना दिया गया?”
सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रशांत मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने सवाल किया कि क्या हाईकोर्ट को जंतर-मंतर में तब्दील कर दिया गया था। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि एक व्हाट्सएप मैसेज के जरिए बड़ी संख्या में वकीलों को एकत्र किया गया, जिससे अराजक स्थिति पैदा हो गई।

कपिल सिब्बल की दलील
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा किसी भी उपकरण को ले जाने का दावा झूठा है और यह पंचनामा से स्पष्ट है। उन्होंने इसे पूर्वाग्रह फैलाने की कोशिश बताया।

इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि मामले में विरोधाभास हैं और जांच जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नोटिस जारी करने से रोका नहीं जा सकता।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है और आने वाली सुनवाइयों में इस पर बड़ा फैसला आने की संभावना है।

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