पहली बार आकांक्षा टोप्पो ने की CM साय और गृह मंत्री विजय शर्मा की खुलकर तारीफ

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अंबिकापुर। विशेष रिपोर्ट।

 

बोलीं—“आवाज वही रहेगी, तेवर वही रहेंगे… बस अब शब्दों की मर्यादा का रखूंगी ध्यान”

 

सोशल मीडिया पर बेबाक अंदाज और जनहित के मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखने वाली आकांक्षा टोप्पो के तेवरों में अब एक नया बदलाव नजर आया है। अपने ताजा वक्तव्य में उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करते हुए सरकार और पुलिस-प्रशासन की सकारात्मक कार्रवाई को स्वीकार किया है।

आकांक्षा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अन्याय के खिलाफ उनकी आवाज पहले की तरह ही बुलंद रहेगी, लेकिन अब भाषा और शब्दों की मर्यादा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने अपने पुराने बयानों को लेकर आत्मस्वीकार करते हुए कहा कि सरकार, मंत्रियों और पुलिस-प्रशासन की आलोचना के दौरान कई बार उनकी भाषा जरूरत से ज्यादा कठोर रही है।

“बदले से नहीं, बड़प्पन से इंसान बदलता है”

अपने वक्तव्य में आकांक्षा ने कहा कि “बदले से नहीं, बड़प्पन से इंसान बदलता है।” उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लेकर पूर्व में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को अनुचित बताते हुए कहा कि अब वे व्यक्तिगत टिप्पणी के बजाय मुद्दों, तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर अपनी बात रखेंगी।

उनका कहना है कि सवाल उठाने का अधिकार कायम रहेगा, लेकिन सवाल पूछने का तरीका मर्यादित होना चाहिए।

सोशल मीडिया विवाद के बाद बढ़ा तनाव

आकांक्षा ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर उनके चरित्र को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही थीं। उनके अनुसार रविवार को स्थिति उस समय गंभीर हो गई, जब उनकी गाड़ी का पीछा किया गया, रास्ता रोककर कथित रूप से गाली-गलौज की गई। सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें एक होटल में शरण लेनी पड़ी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और उनकी शिकायत पर FIR दर्ज की गई।

आकांक्षा के मुताबिक बाद में उनके खिलाफ भी FIR दर्ज होने से वे निराश हुई थीं। हालांकि, जब उन्हें रवींद्र तिवारी के खिलाफ भी गंभीर धाराओं में FIR दर्ज किए जाने की जानकारी मिली, तो उन्होंने सरकार और प्रशासन के प्रति अपना नजरिया बदला।

उन्होंने तिवारी पर आदिवासी महिलाओं के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस संबंध में आदिवासी समाज की महिलाओं की ओर से शिकायत की गई थी।

“गलत को गलत कहती हूं तो सही को सही कहने की हिम्मत भी होनी चाहिए”

आकांक्षा ने अपने वक्तव्य में कहा—

“अगर मैं गलत को गलत बोलने की हिम्मत रखती हूं, तो सही को सही बोलने की हिम्मत भी मुझमें होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। उनका उद्देश्य जनहित और न्याय के पक्ष में आवाज उठाना है। उनका कहना है कि जिस सरकार और मुख्यमंत्री की उन्होंने कई बार आलोचना की, यदि उसी शासन में उनकी शिकायत सुनी गई, उन्हें सुरक्षा मिली और कार्रवाई हुई, तो उस सकारात्मक पहलू को स्वीकार करना भी उनकी जिम्मेदारी है।

CM साय, गृह मंत्री समेत अधिकारियों का जताया आभार

आकांक्षा टोप्पो ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा के साथ आईजी सरगुजा दीपक कुमार झा, एसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल, कलेक्टर अजीत वसंत, आईपीएस राहुल बंसल सहित संबंधित अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि सरकार और प्रशासन की प्रशंसा का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे आगे सवाल उठाना बंद कर देंगी।

“सड़क खराब होगी तो सवाल करूंगी, गरीब के साथ अन्याय होगा तो बोलूंगी”

आकांक्षा ने कहा कि यदि सड़क खराब होगी तो वह सवाल उठाएंगी, गरीब के साथ अन्याय होगा तो उसके पक्ष में खड़ी होंगी और आदिवासी, महिला या किसी कमजोर व्यक्ति की आवाज दबाने की कोशिश हुई तो वह अपनी आवाज बुलंद करेंगी।

उन्होंने कहा कि पुलिस-प्रशासन से गलती होगी तो प्रशासन से और सरकार से गलती होगी तो सरकार से भी सवाल किया जाएगा।

अब बदलेगा तरीका, नहीं बदलेगा संघर्ष

आकांक्षा के अनुसार उनके संघर्ष का उद्देश्य और तेवर पहले जैसे ही रहेंगे, लेकिन आगे उनकी कार्यशैली में सबसे बड़ा बदलाव भाषा और शब्दों को होगा। अब व्यक्तिगत या अमर्यादित टिप्पणी के बजाय तथ्य, प्रमाण और मुद्दे को केंद्र में रखकर अपनी बात रखने का प्रयास करेंगी।

अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने कहा—

“आकांक्षा वही रहेगी।

आवाज वही रहेगी।

तेवर वही रहेंगे।

लड़ाई वही रहेगी…

बस अब शब्द बदलेंगे।”

आकांक्षा टोप्पो का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने एक ओर अपने पूर्व के कठोर शब्दों को लेकर आत्मस्वीकार किया है, वहीं दूसरी ओर सरकार और प्रशासन की सकारात्मक कार्रवाई की सार्वजनिक रूप से सराहना भी की है। साथ ही उन्होंने यह संदेश भी दिया है कि समर्थन का अर्थ सवालों से दूरी नहीं, बल्कि सही को सही और गलत को गलत कहने की स्वतंत्रता है।

 

 

 

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