नई दिल्ली। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की राजकीय यात्रा के दौरान, भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को व्यापार, सुरक्षा, रक्षा, गतिशीलता, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को कवर करने वाले 13 समझौतों और व्यवस्थाओं पर हस्ताक्षर किए। ये समझौते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सह-अध्यक्षता में आयोजित 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षरित किए गए।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी परिणामों की सूची के अनुसार, नेताओं ने ‘टुवर्ड्स 2030: ए जॉइंट इंडिया-यूरोपियन यूनियन कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक एजेंडा’ पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जो भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी का मार्गदर्शन करने वाला एक व्यापक ढांचा है। इस यात्रा के दौरान भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर वार्ता भी संपन्न हुई, जो भारत के इतिहास का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है और जिसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच आर्थिक और निवेश संबंधों को बढ़ावा देना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के संपन्न होने का स्वागत करते हुए इसे केवल एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि साझा समृद्धि का खाका बताया। यूरोपीय नेताओं के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक तालमेल और मजबूत जन-संबंधों के आधार पर हाल के वर्षों में भारत-यूरोपीय संघ के संबंध तेजी से विकसित हुए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत-यूरोपीय संघ का व्यापार 180 अरब यूरो का है।
रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में, भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी (एसडीपी) को औपचारिक रूप दिया गया, जिससे समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग एवं प्रौद्योगिकी, साइबर एवं हाइब्रिड खतरों, अंतरिक्ष एवं आतंकवाद-विरोधी गतिविधियों में सहयोग को गहरा करने के लिए अपनी तरह का पहला ढांचा तैयार हुआ। गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाने और रक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए भारत-यूरोपीय संघ सूचना सुरक्षा समझौते पर भी बातचीत शुरू की गई।









