सरगुजा : विकास का ‘कमीशन मॉडल’: बिल पास कराने के लिए क्या अब आत्मदाह की डिग्री चाहिए?

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अम्बिकापुर/सरगुजा

 

अंबिकापुर। सरगुजा में ‘जल जीवन मिशन’ का एक ऐसा ‘चमत्कारी’ रूप सामने आया है, जहाँ लोगों के घरों में पानी तो पहुँच गया है, लेकिन उस पानी को पहुँचाने वाले ठेकेदार के घर में ‘चूल्हा’ बुझने की नौबत आ गई है। सिस्टम की ऐसी “ईमानदारी” देखिए कि साल भर पहले काम पूरा होने के बाद भी ठेकेदार का भुगतान फाइलों के नीचे दबे ‘कमीशन’ के इंतजार में दम तोड़ रहा है।

 

अब हालात यह हैं कि ठेकेदार रजनीकांत अग्रवाल ने विकास की इस ‘बहती गंगा’ में हाथ धोने के बजाय, खुद को आग के हवाले करने का फैसला कर लिया है।

 

विकास का ‘कमीशन’ मॉडल : पहले हफ्ता, फिर भुगतान? – कहानी बड़ी फिल्मी है, लेकिन किरदार असली और सरकारी हैं। ठेकेदार का आरोप है कि उन्होंने 65 लाख का पसीना बहाया, लेकिन विभाग ने सिर्फ 22 लाख का ‘मरहम’ लगाया। बाकी के 43 लाख रुपये पीएचई (PHE) के सब इंजीनियर धर्मेंद्र सिंह की मेज की दराज और ठेकेदार की ईमानदारी के बीच फंसे हुए हैं।

आरोप है कि इंजीनियर साहब को ‘विकास’ में अपना हिस्सा चाहिए। जब तक कमीशन की ‘पाइपलाइन’ क्लियर नहीं होगी, तब तक बिल पास होना नामुमकिन है। यह जल जीवन मिशन है जनाब, यहाँ प्यास बुझाने के लिए सिर्फ पानी नहीं, ‘पॉकेट’ भी देखनी पड़ती है।

 

सरकारी विडंबना : पानी सप्लाई चालू, लेकिन बिल ‘कोमा’ में  विभागीय कार्यकुशलता की दाद देनी होगी! लखनपुर के जुड़वानी में पानी की टंकी खड़ी है, पाइप बिछ चुके हैं, नल से जल टपक रहा है और पिछले 6 महीने से गांव वाले मजे से पानी पी रहे हैं। लेकिन कागजों में शायद यह काम अभी ‘अदृश्य’ है।

 

“साहब, टंकी से पानी तो निकल रहा है, पर फाइलों से पैसा नहीं निकल रहा। शायद अधिकारियों को डर है कि कहीं बिना कमीशन के भुगतान कर दिया तो विभाग की ‘पुरानी परंपरा’ को ठेस न पहुँच जाए।”

 

30 मार्च : आत्मदाह का अल्टीमेटम या सिस्टम का तमाशा?  परेशान ठेकेदार ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। 30 मार्च दोपहर 1 बजे का समय तय है और पीएचई कार्यालय का गेट ‘रंगमंच’। अगर भुगतान नहीं हुआ, तो ठेकेदार खुद को आग लगा लेगा।

 

इधर, कलेक्टर अजीत वसंत ने ‘जांच’ का वही पुराना और घिसा-पिटा हथियार निकाल लिया है। कारण बताओ नोटिस जारी हो रहे हैं, ईई (EE) साहब को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। अब देखना यह है कि क्या यह जांच 30 मार्च से पहले पूरी होती है, या फिर हमेशा की तरह प्रशासन तभी जागेगा जब धुआं उठेगा?

 

 जल जीवन मिशन का नारा है – ‘हर घर जल’ पर सरगुजा का नया नारा लगता है- ‘हर बिल पर दलदल और इंजीनियर का मंगल’।

 

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