पत्रकार को नोटिस पर बवाल: शिकायत जिस थाना प्रभारी के खिलाफ, उसी थाने में बयान के लिए बुलाने पर उठे सवाल

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बलरामपुर-रामानुजगंज। विशेष रिपोर्ट

 

 

 

बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले में एक बार फिर पत्रकारों के साथ प्रशासनिक व्यवहार को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद स्वयं को अन्याय का शिकार बताने वाले पत्रकार रामहरी गुप्ता ने मुख्यमंत्री की ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था (सीएम हेल्पलाइन) के माध्यम से बसंतपुर थाना प्रभारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अब उसी शिकायत की जांच के लिए उन्हें बार-बार उसी थाना बसंतपुर में उपस्थित होने के निर्देश दिए जाने से विवाद गहरा गया है।

पत्रकार रामहरी गुप्ता का कहना है कि उन्होंने जिस थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, उसी थाना परिसर में जाकर बयान देना निष्पक्ष जांच की भावना के विपरीत है। उनका कहना है कि बसंतपुर थाने में पदस्थ एक एएसआई लगातार फोन कर उन्हें थाने बुला रहे थे। उन्होंने पुलिस को स्पष्ट रूप से बताया कि वे किसान भी हैं और इन दिनों धान रोपाई के कार्य में व्यस्त हैं। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि कुछ दिनों बाद वे एसडीओपी कार्यालय वाड्रफनगर में उपस्थित होकर अपना बयान देने के लिए तैयार हैं, ताकि जांच निष्पक्ष वातावरण में हो सके।

 

फिर भी जारी हुआ नोटिस

 

इस बीच बसंतपुर थाना प्रभारी कार्यालय से 2 अगस्त 2026 को एक लिखित नोटिस जारी किया गया। नोटिस में उल्लेख है कि सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत के संबंध में शिकायतकर्ता को पहले मोबाइल के माध्यम से संपर्क कर थाने बुलाया गया था, लेकिन उनके उपस्थित नहीं होने पर 3 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे अनिवार्य रूप से थाना बसंतपुर में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि शिकायत का समय-सीमा के भीतर निराकरण किया जा सके।

 

निष्पक्ष जांच पर उठे सवाल

 

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पत्रकारों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है। पत्रकारों का कहना है कि यदि शिकायत किसी थाना प्रभारी या थाने की कार्यप्रणाली के खिलाफ है, तो जांच के दौरान शिकायतकर्ता को उसी थाने में बुलाना निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में बयान किसी वरिष्ठ अधिकारी, जैसे एसडीओपी या अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिया जाना अधिक उचित और पारदर्शी प्रक्रिया होती।

 

पत्रकार संगठनों की चेतावनी

 

इस मामले पर विभिन्न पत्रकार संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठनों का कहना है कि यदि पत्रकारों की शिकायतों के साथ इसी प्रकार का व्यवहार जारी रहा, तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

 

पत्रकार संगठनों ने कहा कि “छत्तीसगढ़ में जिस तरह पत्रकारों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, वह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है। यदि प्रशासन ने निष्पक्ष रवैया नहीं अपनाया, तो अब सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”

 

पुलिस प्रशासन से उठी मांग

 

पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने पुलिस अधीक्षक बलरामपुर से मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र अधिकारी से कराई जाए तथा शिकायतकर्ता का बयान एसडीओपी कार्यालय या किसी अन्य निष्पक्ष स्थान पर दर्ज कराया जाए, ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी प्रकार का संदेह न रहे।

 

 

 

 

 

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