बिलासपुर। विशेष रिपोर्ट।
शारद उत्सव 2026 के तहत भव्य आयोजन, रवींद्र संगीत से सैक्सोफोन की मधुर धुनों तक कलाकारों ने मोहा मन; बंगाली संस्कृति, साहित्य और सामाजिक एकता का दिखा अनुपम संगम
बिलासपुर। बंगाली संस्कृति की समृद्ध विरासत, संगीत की मधुर स्वर लहरियों, मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों और कविता के भावपूर्ण पाठ से सजी आगमनी सांस्कृतिक संध्या ने बिलासपुर में उत्सव का अनूठा वातावरण निर्मित किया। बिलासपुर बंगाली समाज के तत्वावधान में 10 अक्टूबर 2026 को बंगाली समाज मंच पर आयोजित इस समारोह में कलाकारों, साहित्यप्रेमियों और समाज के गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। शारद उत्सव 2026 के इस विशेष आयोजन में मां दुर्गा के आगमन की भावनाओं के साथ बंगाली परंपरा, कला और सांस्कृतिक एकजुटता की सुंदर झलक देखने को मिली।

रवींद्र संगीत से हुआ शुभारंभ, दिवंगत समाजसेवी को दी श्रद्धांजलि
आगमनी सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ रवींद्र संगीत ‘आकाशभरा सूर्य-तारा’ की मनमोहक प्रस्तुति से हुआ। इसके बाद संगठन के सदस्यों ने सामूहिक रूप से ‘ओ मेनका, ओ मेनका’ प्रस्तुत कर कार्यक्रम को उत्सवमय बना दिया। संगीत की मधुरता और कलाकारों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने शुरुआत से ही श्रोताओं को आकर्षित किया।
इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष श्री देवाशीष नंदी ने उपस्थितजनों को महालया एवं देवीपक्ष की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। वहीं, बंगाली समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व श्री श्यामा दास घोष के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान उपस्थित लोगों ने उनके प्रति सम्मान और संवेदना व्यक्त की।

संगीत की स्वर लहरियों ने बांधा समां
कार्यक्रम के संगीत सत्र में श्रीमती मौमिता चक्रवर्ती, श्रीमती प्रतिमा पाल, श्रीमती मौसुमी चक्रवर्ती, श्रीमती स्वागता चौधरी, श्री शुभ्रांशु शेखर घोष, श्री सौरभ चक्रवर्ती, श्रीमती अपराजिता चौधरी, श्रीमती अपर्णा घोष, श्रीमती जयश्री भट्टाचार्य, श्रीमती रेखा दास, श्रीमती स्वस्तिका विश्वास, श्रीमती स्वागता सूर, श्री देवाशीष नंदी, श्री राजा दासगुप्ता और श्रीमती कल्याणी दे सहित अनेक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक संध्या को यादगार बनाया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण डॉ. सुदीप्त दत्त की सैक्सोफोन प्रस्तुति रही। सैक्सोफोन की मधुर धुनों ने वातावरण को संगीतमय बना दिया और उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कविता, हास्य और नृत्य ने दर्शकों का जीता दिल
आगमनी संध्या में संगीत के साथ साहित्य और हास्य का भी अनूठा संगम देखने को मिला। मास्टर आयुष प्रमाणिक ने कविता पाठ किया, वहीं डॉ. सोमनाथ मुखर्जी ने अपनी हास्य-रचना के माध्यम से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
श्रीमती गोपा दासगुप्ता के निर्देशन में सुपर्णा राय गुप्ता, सुस्मिता राय, श्रीमती सुस्मिता घोष, श्रीमती पूजा प्रमाणिक, श्रीमती मौमिता चक्रवर्ती, श्रीमती श्रुति साहा, श्रीमती अदिति याग्यासी और श्रीमती सुमिता दास ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों की भाव-भंगिमाओं, तालमेल और सहज अभिव्यक्ति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
समारोह का एक अन्य प्रमुख आकर्षण श्री राजा दासगुप्ता के निर्देशन में प्रस्तुत कविता कोलाज रहा। इसमें श्रीमती सोमा मुखर्जी, श्रीमती स्वस्तिका विश्वास, श्रीमती स्वागता सूर, श्रीमती गोपा दासगुप्ता, श्रीमती प्रतिमा पाल, श्रीमती उमा दास, श्रीमती ईप्सिता दत्त और श्रीमती जयश्री भट्टाचार्य ने सहभागिता निभाई। कविता और पाठ की इस सामूहिक प्रस्तुति ने दर्शकों को साहित्यिक संवेदनाओं से जोड़ते हुए कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।

आयोजन में सहयोग और कुशल मंच संचालन
सांस्कृतिक संध्या को सफल बनाने में अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संगीत संयोजन में कैलाश डोडवानी ने सहयोग दिया, जबकि तबले पर जय दे ने संगत की। श्री अशोक बोस और श्री संगीत मैत्र ने आयोजन संबंधी व्यवस्थाओं में सहयोग किया। पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन श्री राजा दासगुप्ता ने किया।
गणमान्य नागरिकों और संस्कृतिप्रेमियों की रही उपस्थिति
समारोह में श्री मानव चटर्जी, श्री तमाल चटर्जी, श्री बी.सी. गोलदार, श्री प्रवीर सेनगुप्ता, डॉ. सुदीप्त दत्त, श्री कौशिक मित्र, श्री सिद्धार्थ भट्टाचार्य, श्री चंदन कुमार गांगुली, बी.बी.पी.एल. के संस्थापक श्री प्रवीर घोष, श्री सुब्रत चट्टोपाध्याय, श्री संदीप चटर्जी, श्रीमती तृप्ति चटर्जी, श्रीमती स्वप्ना जाना, डॉ. सोमनाथ मुखर्जी और श्री विभु रंजन घोष सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं संस्कृतिप्रेमी उपस्थित रहे।
1995 से संस्कृति संरक्षण की अनवरत यात्रा
श्री अखिल रंजन घोष द्वारा वर्ष 1995 में स्थापित बिलासपुर बंगाली समाज लंबे समय से शहर में बंगाली भाषा, संस्कृति, साहित्य और परंपराओं के संरक्षण तथा सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में अध्यक्ष श्री देवाशीष नंदी, सचिव श्री बिलास कुमार दास और कोषाध्यक्ष श्री जीवन घोष के नेतृत्व में संगठन अपनी सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।
आगमनी समारोह इसी सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया। संगीत, नृत्य, कविता और साहित्यिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकारों ने दुर्गापूजा के आगमन की भावनाओं को जीवंत किया और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का संदेश दिया।
संस्कृति, परंपरा और एकता का यादगार उत्सव
बिलासपुर बंगाली समाज की आगमनी सांस्कृतिक संध्या महज मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति रही। वर्ष 1995 से जारी संगठन की सांस्कृतिक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सामूहिक प्रयास, समर्पण और परंपराओं के प्रति निष्ठा से संस्कृति की विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सहेजा जा सकता है।
शारद उत्सव 2026 की यह संध्या कलाकारों की प्रतिभा, आयोजकों के समर्पण और बंगाली समाज की सांस्कृतिक एकजुटता की यादगार मिसाल बनकर सामने आई।










