बिलासपुर। स्वराज जयसवाल विशेष रिपोर्ट।
नकद लेन-देन का लालच देकर बिछाया ठगी का जाल, पुलिस ने बलेनो कार, स्कूटी, मोबाइल और नकदी की जब्त
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में साइबर ठगों ने च्वाइस सेंटर संचालकों को निशाना बनाकर लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। QR कोड के जरिए कथित साइबर ठगी के इस बड़े मामले में रेंज साइबर पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने बिलासपुर समेत प्रदेश के नौ जिलों में करीब 45 च्वाइस सेंटर संचालकों को अपना शिकार बनाया। ठगी की कुल रकम करीब 20 से 25 लाख रुपये आंकी गई है।
इस कार्रवाई के बाद साइबर ठगी के ऐसे तरीकों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं, जिनमें ऑनलाइन लेन-देन और नकद भुगतान के लालच का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसाया जाता है।

नकद लेन-देन का लालच, फिर QR कोड से ठगी
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने च्वाइस सेंटर संचालकों को नकद लेन-देन का लालच दिया और QR कोड का इस्तेमाल कर कथित तौर पर ठगी की वारदातों को अंजाम दिया। इस तरीके से अलग-अलग जिलों के कई च्वाइस सेंटर संचालक प्रभावित हुए। जांच के दौरान करीब 45 सेंटरों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।

रायपुर के दो आरोपी गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने रायपुर निवासी अंकित आहूजा (32 वर्ष) और आशीष केवटवानी (32 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब मामले से जुड़े तथ्यों और ठगी की रकम के संबंध में आगे की जांच कर रही है।
नकदी से लेकर कार और स्कूटी तक जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से निम्नलिखित सामान जब्त किया है—
1 लाख 2 हजार रुपये नकद
एक बलेनो कार
एक स्कूटी
दो मोबाइल फोन
जब्त वाहनों और मोबाइल फोन की जांच से मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
रेंज साइबर थाने में दर्ज हुआ अपराध
इस मामले में रेंज साइबर थाना बिलासपुर में अपराध क्रमांक 05/2026 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 317(4) और 3(5) के अंतर्गत कार्रवाई की है।
च्वाइस सेंटर संचालक रहें सतर्क
इस घटना ने च्वाइस सेंटर संचालकों के लिए साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत को फिर उजागर किया है। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर QR कोड के जरिए लेन-देन करने से पहले भुगतान की पूरी प्रक्रिया और प्राप्तकर्ता की जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।
संदिग्ध लेन-देन या ठगी की आशंका होने पर तत्काल संबंधित बैंक और पुलिस को सूचना दें। थोड़ी-सी सावधानी आपकी मेहनत की कमाई को साइबर ठगों के हाथों में जाने से बचा सकती है।










