शिक्षकों के करियर पर बड़ा प्रभाव, DPC प्रक्रिया पर भी असर संभव
छत्तीसगढ़ में प्राचार्य पद पर पदोन्नति के लिए बीएड अनिवार्यता को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। बिलासपुर हाईकोर्ट की डबल बेंच आज, 26 मार्च 2025, को इस विवादास्पद मुद्दे पर अहम फैसला सुना सकती है। यह निर्णय सैकड़ों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है, जो प्राचार्य पद की योग्यता को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।

बीएड अनिवार्यता को लेकर दो याचिकाएं दायर
हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर दो प्रमुख याचिकाएं दायर की गई हैं:
- व्याख्याता अखिलेश त्रिपाठी की याचिका:
- उन्होंने तर्क दिया कि प्राचार्य पद के लिए बीएड अनिवार्य किया जाना चाहिए।
- केवल बीएड धारकों को ही पदोन्नति दी जानी चाहिए।
- प्राचार्य पदोन्नति फोरम की याचिका:
- फोरम का दावा है कि प्राचार्य पद प्रशासनिक होता है, न कि शैक्षणिक, इसलिए डीएड/बीटीआई/डीएलएड धारकों को भी पदोन्नति का अधिकार मिलना चाहिए।
- 10% पदों पर सीधी भर्ती में बीएड अनिवार्य है, लेकिन विभागीय पदोन्नति (DPC) प्रक्रिया में ऐसा कोई स्पष्ट नियम नहीं है।
लोक सेवा आयोग से फोरम की बैठक
20 मार्च 2025 को प्राचार्य पदोन्नति फोरम के प्रतिनिधियों ने लोक सेवा आयोग की अध्यक्ष रीता शांडिल्य से मुलाकात की।
- आयोग ने DPC प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आश्वासन दिया।
- प्रक्रिया में 1-2 दिन का अतिरिक्त समय लग सकता है।
- स्कूल शिक्षा विभाग भी हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा है।
हाईकोर्ट के संभावित फैसले और प्रभाव
| संभावित फैसला | प्रभाव |
|---|---|
| अगर कोर्ट बीएड को अनिवार्य मानता है | हजारों डीएड/बीटीआई धारक शिक्षकों को झटका लग सकता है। |
| अगर कोर्ट बीएड को अनिवार्य नहीं मानता | DPC प्रक्रिया में बदलाव होगा, और प्राचार्य पदोन्नति फोरम को राहत मिलेगी। |
| यह फैसला छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य राज्यों में भी प्रभाव डाल सकता है। | राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत बदलाव संभव हैं। |









