छत्तीसगढ़ में CBI का बड़ा एक्शन: महादेव सट्टा ऐप केस में पूर्व CM भूपेश बघेल, विधायक देवेंद्र यादव और 4 IPS अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी

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महादेव सट्टा ऐप घोटाले में CBI की ताबड़तोड़ कार्रवाई

छत्तीसगढ़ में महादेव सट्टा ऐप से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बुधवार, 26 मार्च को बड़ी कार्रवाई करते हुए रायपुर, भिलाई, दुर्ग सहित 50 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, उनके पूर्व OSD, कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, केपीएस स्कूल के संचालक निशांत त्रिपाठी और 4 IPS अधिकारियों सहित 7 पुलिसकर्मियों के ठिकानों पर CBI ने दबिश दी।

CBI ने जब्त किए दस्तावेज, समर्थकों और पुलिस में हुई झड़प

CBI ने छापेमारी के दौरान संबंधित स्थानों से दस्तावेजों की जांच की और कई लोगों से पूछताछ की। इसी बीच, जैसे ही छापेमारी की सूचना फैली, भूपेश बघेल के समर्थक और कांग्रेस कार्यकर्ता उनके निवास पर इकट्ठा हो गए। पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की नौबत भी आ गई, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित किया। इस कार्रवाई के चलते राज्य की राजनीति में उथल-पुथल मच गई है।

CBI की कार्रवाई किन-किन के ठिकानों पर हुई?

  • पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल: रायपुर स्थित निवास पर CBI ने छापा मारा।
  • पूर्व OSD मनीष बंछोर: भिलाई-3 स्थित घर का ताला तोड़कर CBI टीम ने प्रवेश किया।
  • विधायक देवेंद्र यादव: भिलाई के सेक्टर-5 स्थित घर पर छापेमारी, परिवार ने जताया विरोध।
  • IPS अभिषेक पल्लव: भिलाई के सेक्टर-9 स्थित घर पर पूछताछ, अधिकारी को घर में ही रोका गया।
  • IPS अभिषेक माहेश्वरी: रायपुर स्थित घर सील किया गया, लेकिन वहां कोई मौजूद नहीं था।
  • अन्य IPS अधिकारी: आनंद छाबड़ा, आरिफ शेख और प्रशांत अग्रवाल के घरों पर भी छापेमारी।
  • पुलिसकर्मी संजय ध्रुव, नकुल और सहदेव: नेहरू नगर स्थित घरों पर CBI की कार्रवाई।

विधायक देवेंद्र यादव की मां ने जताया विरोध

CBI की टीम जब विधायक देवेंद्र यादव के भिलाई स्थित घर पर पहुंची, तो उनकी मां ने एजेंसी को करीब एक घंटे तक अंदर जाने से रोका। बाद में समझाइश के बाद टीम ने जांच शुरू की। बताया जा रहा है कि विधायक देवेंद्र यादव इस समय दिल्ली में हैं।

राजनीतिक गलियारों में हलचल, बढ़ा सियासी पारा

महादेव सट्टा ऐप घोटाले में CBI की यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मचा रही है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। इस छापेमारी से आगामी चुनावी समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।

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