नई दिल्ली : चैत्र नवरात्रि 2025 का पावन पर्व जारी है, और आज, छठे दिन, मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की उपासना से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
आज के दिन रवि योग, सौभाग्य योग, शोभन योग, बुधादित्य योग समेत कई शुभ योग बन रहे हैं। इन योगों में मां की पूजा करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
मां कात्यायनी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने मां भगवती को प्रसन्न करने के लिए हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी कि मां दुर्गा उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती ने उन्हें वरदान दिया और महर्षि कात्यायन के घर पुत्री के रूप में प्रकट हुईं। इसी कारण उन्हें मां कात्यायनी के नाम से जाना जाता है।
मां कात्यायनी का स्वरूप
माता कात्यायनी का ध्यान करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उनका रंग स्वर्ण के समान चमकदार है और उनकी चार भुजाएं हैं।
दाहिनी ओर की ऊपर वाली भुजा अभय मुद्रा में है, जो भक्तों को भयमुक्त होने का आशीर्वाद देती है।
दाहिनी ओर की नीचे वाली भुजा वर मुद्रा में है, जो भक्तों को सुख-समृद्धि प्रदान करती है।
बाईं ओर की ऊपर वाली भुजा में तलवार धारण किए हुए हैं, जो बुराई के विनाश का प्रतीक है।
बाईं ओर की नीचे वाली भुजा में कमल का फूल है, जो शुद्धता और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है।
मां कात्यायनी की पूजा श्रद्धा और भक्ति भाव से करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।








